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कॉन्ट्रैक्‍ट नियुक्ति को लेकर रघुवर पर हेमंत का प्रहार : ‘स्‍थायी नौकरी की बात क्‍यूं नहीं करते सीएम साहब ?’  

Ranchi: ‘कॉन्ट्रैक्ट पर कॉन्ट्रैक्ट – स्‍थायी नौकरी की बात क्‍यूं नहीं करते हैं सीएम साहब.‘ कुछ इसी अंदाज में झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय अध्‍यक्ष हेमंत सोरेन ने मुख्‍यमंत्री रघुवर दास के एक बयान पर पलटवार करते हुए निशाना साधा है. हेमंत सोरेन अपने ट्विटर हैंडल से रघुवर दास के ट्वीट पर करारा प्रहार करते हुए कहा है कि ‘झारखंड के युवाओं को बर्बाद करने के लिए अब यही कसर बाकी रह गया था, पहले कॉन्ट्रैक्ट पर रखो फिर उम्र निकल जाने पर निकाल दो. फिर धरना प्रदर्शन, रोड जाम, झारखंड जाम. क्‍या ऐसा होगा. मुख्‍यमंत्री रघुवर दास ने अपने ट्विटर अकाउंट में पोस्‍ट कर कहा था कि झारखंड से गरीबी खत्‍म करने के लिए शिक्षा बेहद जरूरी है. अगर शिक्षकों की कमी है तो सभी उपायुक्‍त, नौजवानों को कॉन्ट्रैक्ट पर रखें. स्‍वाथ्‍य के क्षेत्र में भी इस फॉर्मूले को लागू कर सकते हैं. जहां एएनएम की कमी है, वहां ट्रैनिंग देकर ग्रैजुएट युवाओं को कॉन्ट्रैक्ट पर रखें.

हेमंत सोरेन के ट्वीट पर रघुवर के खिलाफ कमेंट

हेमंत सोरेन के ट्विटर हैंडल पर मुख्‍यमंत्री रघुवर दास के खिलाफ लोगों के कमेंट की बाढ़ आ गई है. अभिषेक पांडेय ने लिखा है साहब का भी कॉन्ट्रैक्ट एक साल का बचा हुआ है. उसके बाद रिन्‍यूअल का कोई ऑप्‍शन नहीं है.

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जिस ट्विट पर हेमंत ने किया पलटवार, मुख्‍यमंत्री के उस ट्विट पर भी पड़ रहे ऐसे कमेंट

मुख्‍यमंत्री रघुवर दास के ट्विटर कमेंट पर हेमंत सोरेन ने जिस तरह कमेंट किया है, वैसा ही कमेंट आम यूजर भी कर रहे हैं. प्रवीण स्‍वर्णकार ने रघुवर दास के पोस्‍ट पर लिखा है ‘ मैं एक बीजेपी और मोदी समर्थक हूं, लेकिन मैं झारखंड सरकार के काम से नाखुश हूं. झारखंड सरकार को बचाने के लिए युवाओं को भी साथ लेकर चलना होगा. सुमित कुमार डे ने लिख है ‘ऐसा नहीं हो कि 2019 में आप सत्‍ता से ना बाहर हो जायें, क्‍योंकि शिक्षित युवा बहुत नाराज हैं. बिपिन मालाकार कहते हैं ‘यही उम्‍मीद थी आपसे. कॉन्ट्रैक्ट पर कभी अपने बाल बच्‍चों को भी रखें, तब पढ़े लिखे होने का एहसास पता चल जायेगा. घिन आती है अब आपकी सोच पर. बर्बाद कर दिया आपने युवा लोगों के भविष्‍य को…

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झारखंड के सरकारी विभागों में 83 प्रतिशत तक कर्मचारियों की कमी

राज्य के विभिन्न विभागों में 70 प्रतिशत तक सरकारी कर्मचारियों की कमी है. राज्य सरकार में सरकारी कर्मचारियों के कुल 3,78,816 पद स्वीकृत हैं. इसके मुकाबले सिर्फ 2,16,935 सरकारी कर्मचारी ही कार्यरत हैं. शेष 1,61,881 पद खाली हैं. जो कुल स्वीकृत पद का 42.73 फीसदी कम है. कर्मचारियों के मामले में सबसे बेहतर स्थिति विधानसभा की है.  राज्य सरकार में तीन तरह के कर्मचारी हैं. इनमें सरकारी, सहायता अनुदान मद और संविदा पर कार्यरत कर्मचारी शामिल हैं.  कर्मचारियों की कमी से विकास योजनाओं पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की बात कही जाती है. आंकड़ों के अनुसार, राजस्व स्रोतों के विभाग में भी कर्मचारियों की कमी है. राज्य के सबसे बड़े राजस्व स्रोत वाले वाणिज्यकर विभाग में 48.11 फीसदी कर्मचारी कम है. उत्पाद विभाग में भी 74 फीसदी कर्मचारियों की कमी है.

     विभाग                      स्वीकृत     कार्यरत      कमी

भवन निर्माण                    1877        793        57.75%

वन पर्यावरण                     7518        4556      39.39%

जल संसाधन                     12979      7559      41.75%

पर्यटन एंव कला संस्कृति   720         214        70.02%

उत्पाद                               1151         299        74.02%

राज्यपाल सचिवालय        140          134        4.28%

वाणिज्यकर                       983        510         48.11%

विधानसभा                        1107      1045        5.6%

पीआरडी                            832        144        82.69%

खान भूतत्व                       2951      977        66.89%

श्रम नियोजन                     4236     1269      70.66%

सूचना प्रावैधिकी                 28         12           57.14%

उच्च तकनीक शिक्षा          2099     610        70.93%

पेयजल                              4552     2660     41.56%

स्कूली शिक्षा                      80030   60281   24.67%

स्वास्थ चिकित्सा              41422     16212    60.86%

मंत्रीमंडल निर्वाचन            129          103        20.15%

मंत्रीमंडल निगरानी            1292      565         56.26%

गृह कारा आपदा                121436   74247    38.86%

योजना सह वित                2418       895        62.98%

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