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हरियाणा में कृषि बिल के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों पर पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे

Hariyana : कृषि बिल के खिलाफ पंजाब और हरियाणा में किसानों का आंदोलन लगातार तेज हो रहा है. कुछ दिनों पूर् एक किसान ने प्रदर्शन के दौरान आत्महत्या की कोशिश की थी उसे गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था. इधर पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर पंजाब और हरियाणा में किसान गुस्से में दिख रहे हैं और वे सड़क पर है. इस बिल को किसान विरोधी बताते हुए वे वापस लेने की मांग कर रहे हैं. बुधवार को पानीपत में दिल्ली की ओर रवाना होनेवाले किसानों पर हरियाणा पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे हैं. प्रदर्शनकारी किसानों पर पानी की बौछार की गई है. कई किसानों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है.

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किसानों ने अध्यादेश को डेथ वारंट कहा

 

इधर प्रदर्शनकारी किसानों ने इसे काला कानून कहा है. उनका कहना है कि यह अध्यादेश किसानों का डेथ वारंट है और इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे. किसानों ने कहा कि जो पहले से उन्हें मिल रहा है, वह उसको लेकर खुश हैं. सरकार और ज्यादा देने का प्रयास ना करें. उन्होंने यह भी कहा कि सरकार किसानों की जमीन को अडानी और अंबानी जैसे पूंजीपतियों के हाथों बेचने का प्रयास कर रही है.प्रदर्शन में शामिल किसान नेताओं ने कहा कि सरकार लोगों के साथ धोखा कर रही है, क्योंकि तीनों अध्यादेश पूंजीपतियों के लिए है. पूंजीपति, किसानों की फसल का मनचाहा एमएससी लगाएंगे, जिससे किसान की हालत और भी ज्यादा खराब होगी. आज पूरे देश का किसान रोड पर उतर कर इसका विरोध कर रहा है.

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25 सितंबर को देशव्यापी प्रदर्शन का निर्णय

इधर इस आंदोलन को और तेज करने की रणनीति बनायी जा रही है. भारतीय किसान यूनियन और अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति ने 25 सितंबर को भारत बंद करने की घोषणा की है. भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने बताया कि देशभर के किसान 25 सितंबर को कृषि सुधार विधेयक 2020 के विरोध में धरना प्रदर्शन और चक्का जाम करेंगे.

किसान यूनियन के महासचिव धर्मेंद्र मलिक ने कहा कि सरकार ने किसानों के पेट पर लात मारने का काम किया है. भारतीय किसान यूनियन इस हक की लडाई को मजबूती के साथ लड़ेगी.

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