
Kumar Gaurav
Ranchi : राज्य में स्वास्थ्य सुधार के लिए कई तरह के कार्यक्रम की घोषणाएं लगातार की जा रही है. केंद्र द्वारा जारी रिपोर्ट में झारखंड को स्वास्थ्य सुधार के मामले में प्रथम रैंक दिये जा रहे हैं. जिलों में स्वास्थ्य उपक्रम और डायलिसिस सेंटर, मोबाइल सेवा वाहन तक के संचालक के सब्जबाग दिखाए जा रहे हैं. सारे के सारे वादे एक झटके में तथ्यहीन लगने लगे हैं. राज्य के सबसे बड़े अस्पताल में पिछले छत्तीस घंटे के अंदर तीस से अधिक मरीजों की जान चली गयी है.
Kumar Gaurav
Ranchi : राज्य में स्वास्थ्य सुधार के लिए कई तरह के कार्यक्रम की घोषणाएं लगातार की जा रही है. केंद्र द्वारा जारी रिपोर्ट में झारखंड को स्वास्थ्य सुधार के मामले में प्रथम रैंक दिये जा रहे हैं. जिलों में स्वास्थ्य उपक्रम और डायलिसिस सेंटर, मोबाइल सेवा वाहन तक के संचालक के सब्जबाग दिखाए जा रहे हैं. सारे के सारे वादे एक झटके में तथ्यहीन लगने लगे हैं. राज्य के सबसे बड़े अस्पताल में पिछले छत्तीस घंटे के अंदर तीस से अधिक मरीजों की जान चली गयी है. पिछले आठ महिनों में रिम्स में आठ बार हड़ताल हो चुका है. और इस हड़ताल की वजह से 50 से अधिक लोगों की जान चली गयी, पर किसी ने मानवीय तौर पर भी मरीजों की सुध नहीं ली. आठ बार हुए हड़ताल में र्सिफ एक बार ही तत्कालिन स्वास्थ्य सचिव सुधीर त्रिपाठी ने नर्सों से वार्ता कर मामले को सुलझाया था. इस बार भी किसी अधिकारी और मंत्री को मामले के निपटारे के लिए आगे नहीं आना स्वास्थ्य विभाग की संवेदनहीनता को दर्शाता है.
नहीं है कोई वैकल्पिक व्यवस्था
रिम्स में प्रत्येक घंटे औसतन 50 से अधिक मरीज इमरजेंसी इलाज के लिए आते हैं. पर हड़ताल में चले जाने की वजह से मरीजों का इलाज नहीं हो पा रहा है. मजबूरन या तो वे प्राइवेट महंगे अस्पताल में इलाज कराने को मजबूर हो जा रहे हैं या फिर मरीज दम तोड़ दे रहे हैं. रिम्स में हजारों की संख्या में मरीज एडमिट हैं उनको अगर कुछ हो जाता है तो इसके लिए जिम्मेवार कौन होगा ? हड़ताल का आदी हो चुका रिम्स आठ महीने में आठ बार हड़ताल में जा चुका है. इसके बावजूद रिम्स प्रबंधन या स्वास्थ्य विभाग किसी भी प्रकार की वैकल्पिक व्यवस्था करा पाने में नाकाम रही है.
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तीन दिन बाद लौटेंगे स्वास्थ्य मंत्री, उसके बाद ही करेंगे समस्या का निदान
हड़ताल में मरीजों की मौत हो रही है. राज्य भर से आए मरीज नर्स और जूनियर डाॅक्टरों के आगे हाथ जोड़ते और मिन्नतें करते नजर आए. पर गुस्से से लाल नर्स और जूनियर डाॅक्टर हड़ताल में जाने के साथ-साथ अमानवीय भी हो गए हैं. स्वास्थ्य मंत्री ने भी कहा है कि वे अभी बाहर हैं और दो से तीन दिन के बाद ही आकर मामले का निपटारा करेंगे. मरीजों की जान जा रही है और स्वास्थ्य मंत्री को इसकी चिंता शायद ही है.
30 घंटे बीत जाने के बाद भी किसी ने नहीं ली सुध
हड़ताल के 30 घंटे से अधिक बीत जाने के बाद भी अभी तक किसी भी प्रबंधन और प्रशासन से जुड़े अधिकारियों ने इसकी सुध तक नहीं ली है. स्वास्थ्य सचिव निधि खरे और स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी भी अभी तक रिम्स का हाल जानने नहीं पहुंचे हैं. विदित हो कि इस दौरान डेढ़ दर्जन से अधिक मरीजों की मौत हो चुकी है.
क्या है नर्सों की मांग
- नर्स से मारपीट करने वाले आरोपियों की गिरफतारी अतिशीघ्र हो.
- नर्सों व जूनियर डाॅक्टरों को सुरक्षा दी जाए.
- रिम्स में मौजूद सुरक्षा एजेंसी को तत्काल प्रभाव से हटाया जाए.
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