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RIMS के डॉक्टर ने किये हैं कई चमत्कार

कुमारी नेहा

Ranchi, 1September: रांची के रिम्स से आए दिन मौत की खबरें आ रही हैं. इन सबके बीच हम कुछ ऐसे डॉक्टर की कहानी लेकर आए हैं जिन्होंने ये साबित कर दिया कि डॉक्टर धरती के भगवान हैं. भगवान तो सिर्फ एक बार जीवन देते हैं, लेकिन ये डॉक्टर हम लोगों की जिंदगी बारबार बचाते हैं. ये ऐसे रेयरेस्ट ऑफ रेयर केसेज हैं, जिसके सॉल्यूशन पर खुद डॉक्टरों को विश्वास नहीं था. लेकिन, उन्होंने इसे चैलेंज के रूप में लिया, प्रयास किया और सफलता हासिल कर लोगों को नई जिंदगी दी.

1.रिम्स के डॉक्टरों ने चाईबासा की कमली को नई जिंदगी दी

डॉ साकेतन भगत के नेतृत्व में पांच डॉक्टरों की टीम ने कमली का ऑपरेशन 8 जून को किया था. वह बताते हैं कि स्पिलनोमिगैली (पिल्हा) की बीमारी रेयर होती है, लेकिन हमारे लिए यह एक चुनौती थी, जिसे हमने एक्सेप्ट किया और मरीज को नई जिंदगी दे पाए. चाईबासा के टुंगरी में छोटे से होटल में कुक का काम करने वाले मधु गोप बताते हैं- कभी सोचा नहीं था कि बेटी को ऐसी बीमारी हो जाएगी, जिसका नाम भी नहीं सुना था. लेकिन रिम्स के डॉक्टरों ने उसका सफल आपरेशन कर उसे नई जिंदगी दे दी है. प्राइवेट हॉस्पिटल में आपरेशन का डेढ़ लाख खर्च बताया गया था. लेकिन, उनके पास इतने पैसे नहीं थे कि वे वहां आपरेशन करा सकें.

क्या थी बीमारी: कमली को स्पिलनोमिगैली (पिल्हा) बीमारी थी, जो एक हजार बच्चों में एक को होती है. इसमें शरीर में स्पिलिन के बढ़ने से पेट फूलने लगता है. पेट में दर्द होता रहता है. समय पर इलाज नहीं कराने पर मरीज की जान भी जा सकती है.

2.रिम्स के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ हेमंत नारायण के पास शोएब को हार्ट अटैक के बाद लाया गया

परिजनों को संभवत: हार्ट अटैक की जानकारी नहीं थी. डेढ़ महीने पहले शोएब के परिजन उसके गैस की प्रॉब्लम की शिकायत लेकर रिम्स पहुंचे. जहां डॉ हेमंत ने उसे टेस्ट कराने के लिए लिखा. जब उसकी रिपोर्ट आई तो डॉक्टर भी शॉक्ड रह गए. इस उम्र के लड़के को हार्ट अटैक आया था. जब डॉक्टर ने जांच-पड़ताल की तो मालूम हुआ कि वह चेन स्मोकर था. इससे हार्ट को ब्लड सप्लाई करने वाली एक वेन पूरी तरह ब्लॉक हो गई थी. उसे हॉस्पिटल में एडमिट किया गया और डॉ हेमंत की देखरेख में ट्रीटमेंट शुरू हुआ, जो अब भी जारी है. हालांकि उसे हॉस्पिटल से छुट्टी दे दी गई है लेकिन ऐसे केसेज रेयर होते है. डॉक्टर की मानें तो फिजिकली एक्टिव लोगों को हार्ट अटैक आने पर रिस्क थोड़ा कम होता है. जबकि जो लोग फिजिकली एक्टिव नहीं होते, उनमें रिस्क अधिक होता है.

क्या हुआ था: देवघर के 28 वर्षीय चेन स्मोकर शोएब के हार्ट को ब्लड सप्लाई करने वाली एक वेन पूरी तरह ब्लॉक हो गई है. उसे हार्ट अटैक आया था.

 

3. रिम्स सर्जरी विभाग के डॉक्टरों ने रविवार को एक बच्चे मुमशेद फरास (15) की कमर में फंसे रांड को निकाल उसे नई जिंदगी दी.

डॉक्टरों ने बताया मरीज शनिवार की शाम सात बजे इमरजेंसी में पहुंचा था. मरीज की स्थिति को देख सर्जरी विभाग के डॉ. विनय प्रताप दंग रह गए. डॉक्टरों ने तत्काल ऑपरेशन करने का मन बनाया. दे घंटे बाद रात नौ बजे ऑपरेशन शुरू हुआ और महज दो घंटे बाद कमर में फंसे रॉड को सफलतापूर्वक निकाल दिया. डॉक्टरों ने बताया कि रॉड कूल्हे की हड्डी को तोड़ते हुए जांघ तक पहुंच गया था. उसकी हालत अब खतरे से बाहर है. मरीज बेड़ो का रहनेवाला है.

क्या हुआ था: मुमशेद फरास शनिवार को ऑटो से बेड़ो जा रहा था. जरीया गांव के पास ट्रक से टकरा कर ऑटो क्षतिग्रस्त हो गया था. ऑटो का रॉड टूट कर उसकी कमर में घुस गया था. रॉड को काट कर बेड़ो पुलिस ने उसे रिम्स पहुंचाया था.

4. मेहुल की पेट में तीन फीट का रॉड आर-पार हो गया था

 रिम्स सर्जरी विभाग के डॉ. संदीप अग्रवाल के पास एक केस आया जिसमें हजारीबाग के मेहुल की पेट में तीन फीट का रॉड आर-पार हो गया था. रिम्स सर्जरी विभाग के डॉक्टरों ने लगातार छह घंटे ऑपरेशन कर पेट से रॉड को निकाला था. ऑपरेशन के दस दिन बाद मेहुल सामान्य बच्चों की तरह दौड़ने लगा. 12 वें दिन मेहुल को रिम्स से छुट्टी दे दी गई.

5. दो अर्द्धविकसित बच्चियों

शिशु शल्य सर्जन डॉ. विकास कुमार प्रसाद के यूनिट में नाभि से जुड़ी दो अर्द्धविकसित बच्चियों को लेकर परिजन पहुंचे. नाभि से जुड़ी दो अर्द्धविकसित बच्चियों का सफल ऑपरेशन कर नई जिंदगी दी थी. एक बच्ची का सिर था दूसरी का नहीं.

6.ट्यूमर सिर से शुरू होकर छाती तक फैल

 न्यूरो सर्जन डॉ अनिल कुमार के पास एक मरीज आया जिसको देखकर डॉक्टर भी हैरान हो गए. मरीज का नाम गंगाराम है, जिसका ट्यूमर सिर से शुरू होकर छाती तक फैल गया था. इसे चलने-फिरने और बात करने में भी मुश्किल आती थी.आखिरकार इसे रांची के रिम्स के डॉक्टर्स ने चैलेंज की तरह लिया और ऑपरेशन किया. इस ट्यूमर का ऑपरेशन रिम्स के न्यूरो सर्जन ने सफलतापूर्वक कर दिया. ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति में सुधार है और उसके रिश्तेदार भी बेहद खुश हैं. डॉक्टरों के अनुसार मरीज के सिर पर जन्म से छोटा ट्यूमर था, जो धीरे-धीरे बढ़ता गया. गंगाराम की उम्र 15 साल है. ट्यूमर उसके सिर से निकलकर छाती तक पहुंच गया था. इस कारण उसके सिर में दर्द, चक्कर और आंखों से कम दिखाई देता था. इसका ऑपरेशन साढ़े चार घंटे तक चला. इस मरीज को गांव की ही एक लड़की इलाज के लिए लेकर आई थी. माता-पिता इलाज करवाने में सक्षम नहीं थे. इस कारण लड़की ने हिम्मत दिखाई और मरीज को रिम्स में भर्ती कराया.

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