National

आज से संसद का शीतकालीन सत्रः नागरिकता (संशोधन) विधेयक 2019 समेत कई एजेंडे पर होगी सरकार की नजर

New Delhi: संसद का शीतकालीन सत्र सोमवार से शुरू हो रहा है. 13 दिसंबर तक चलनेवाले इस सत्र में सरकार कई अहम बिल पास कराने की कोशिश करेगी. फिलहाल संसद में 43 विधेयक लंबित हैं.

इनमें से 27 विधेयक पेश करने, विचार करने और पारित करने के लिए सूचीबद्ध किए गए हैं. जबकि सात विधेयक वापस लिए जाने हैं. माना जा रहा है कि नागरिकता (संशोधन) विधयेक 2019 सरकार के मुख्य एजेंडे में शामिल है.

इसे भी पढ़ेंः#JharkhandElection : फिर सही साबित हुई न्यूज विंग की खबर, बदले गये कांके से कांग्रेस उम्मीदवार

वहीं इस सत्र में विपक्ष की ताकत पहले से मजबूत हुई है. दरअसल महाराष्ट्र में सरकार बनाने को लेकर बीजेपी-शिवसेना में हुए मतभेद के बाद शिवसेना ने एनडीए से नाता तोड़ लिया है. और पार्टी से केंद्रीय मंत्री बने अरविंद सावंत ने भी इस्तीफा दे दिया है. ऐसे में संयुक्त विपक्ष की ताकत लोकसभा में 200 के आंकड़े को पार कर गई है.

सर्वदलीय बैठक में उठा अर्थव्यवस्था और बेरोजगारी का मुद्दा

सोमवार से शुरू होनेवाले सत्र से पहले विपक्ष ने रविवार को कहा कि वह अर्थिक सुस्ती तथा कृषि संकट के मुद्दे को संसद में उठाएगा. इसके साथ ही विपक्ष ने हिरासत में लिए गए लोकसभा सांसद फारूक अब्दुल्ला को सदन में भाग लेने की अनुमति देने की मांग की.

लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा, “बेरोजगारी, आर्थिक मंदी, प्रदूषण, हम आम आदमी से जुड़े मुद्दे उठाएंगे. पहले ही कई सदस्य फारूक अब्दुल्ला की हिरासत का मुद्दा उठा चुके हैं. उन्हें सदन की चर्चा में शामिल होने की इजाजत दी जानी चाहिए.”

फारुक अब्दुला और चिदंबरम को कार्यवाही में शामिल करने की मांग

विपक्ष ने लोकसभा सांसद फारूक अब्दुल्ला को सदन की कार्यवाही में शामिल किये जाने की सरकार से मांग की है. साथ ही सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक के बाद राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने संवाददाताओं से कहा कि पूर्व वित्त मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता पी चिदंबरम को भी संसद की कार्रवाई में भाग लेने की इजाजत मिलनी चाहिए.

इसे भी पढ़ेंः#Maoist कमांडर का भाई 2 माह से जेल में, परिजन बोले- ‘पुलिस सरेंडर कराने के लिए मिलने भेजती है और रास्ते में गिरफ्तार कर लेती है’

उन्होंने कहा कि अतीत में कई ऐसे उदाहरण हैं, जब इन्हीं परिस्थितियों में सांसदों को सदन में शामिल होने की इजाजत दी गई.

आजाद ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार ने पहले भी विपक्ष को ये भरोसा दिया है कि वे सदन में जो मु्ददे उठाना चाहें, उठा सकते हैं, लेकिन व्यवहार में ऐसा नहीं होता है.

उन्होंने कहा, ‘किसी सांसद को अवैध रूप से हिरासत में कैसे लिया जा सकता है? उन्हें संसद सत्र में भाग लेने की अनुमति दी जानी चाहिए.’ आजाद ने कहा, “वे स्थायी समितियों की जांच के बिना ही विधेयक पारित कराना चाहते हैं.”

सूत्रों ने बताया कि अब्दुल्ला को सत्र में भाग लेने की अनुमति देने के बारे में सरकार की ओर से कोई निश्चित प्रतिक्रिया नहीं मिली.

इस सर्वदलीय बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और कई वरिष्ठ विपक्षी नेताओं ने भाग लिया. बैठक में केंद्रीय मंत्री थावरचंद गहलोत, लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी, राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद और राज्यसभा में कांग्रेस के उप नेता आनंद शर्मा भी मौजूद थे.

बढ़ी विपक्ष की ताकत

शिवसेना के एनडीए से नाता तोड़ने के साथ ही संसद के दोनों सदनों में विपक्ष की ताकत बढ़ी है. शिवसेना के लोकसभा में 18 सांसद हैं और राज्यसभा में तीन सांसद हैं. महाराष्ट्र गतिरोध के बाद शिवसेना अब विपक्षी खेमें में शामिल हो गयी है.

लोकसभा की वेबसाइट के अनुसार, फिलहाल लोकसभा में कांग्रेस के 52 सांसद हैं, डीएमके के 24, टीएमसी के 22 और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के 22 सांसद हैं, जबकि शिवसेना 18 सांसदों के साथ विपक्ष की पांचवी सबसे बड़ी घटक पार्टी है.

इधर बीजेपी ने शिवसेना के विपक्ष में बैठने के निर्णय पर सहमति जतायी है. संसदीय कार्यमंत्री प्रहलाद जोशी ने कहा कि शिवसेना अब कांग्रेस के साथ गठजोड़ बनाने पर काम कर रही है. और उसने विपक्ष में बैठने का विकल्प चुना है. इस पर हम सहमत हैं. उनके मंत्री ने भी सरकार से इस्तीफा दे दिया है.

इसे भी पढ़ेंः#SaryuRoy के दावेदारी छोड़ने के बाद भाजपा ने की प्रत्याशी की घोषणा, जमशेदपुर पश्चिम से देवेंद्र सिंह होंगे उम्मीदवार

Related Articles

Back to top button