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Lucknow, 20 November : उत्तर प्रदेश शिया वक्फ बोर्ड ने राम जन्मभूमि-बाबरी मामले में विभिन्न अदालतों में उसकी तरफ से ‘फर्जी वकील’ खड़े किए जाने का आरोप लगाते हुए इसकी जांच की मांग की. शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी ने अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा ‘‘जहां तक यह बात कही जाती है कि शिया वक्फ बोर्ड इतनी देर से क्यों आया, तो बोर्ड को कभी भी किसी तरह की कोई (अदालती) कापी प्राप्त नहीं है. हमारी तरफ से वहां कोई दावा इसलिये दाखिल नहीं हुआ क्योंकि हमें मालूम ही नहीं था कि वहां हमारे नाम से भी कोई वकील खड़ा है.’’
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रिजवी ने दावा किया, ‘‘जब 21 मार्च 2017 को अदालत ने कहा कि आपसी समझौते के लिये बातचीत की जाए, तब हमने सुन्नी वक्फ बोर्ड से भी बात की लेकिन वह इस बातचीत के प्रस्ताव से सहमत नहीं हुए. तब जब हम इसकी पेचीदगी में गये और फाइलों का मुआयना किया तो पाया कि शिया वक्फ बोर्ड मुकदमे में पक्षकार तो है लेकिन उसकी तरफ से जो वकील खड़े हैं उनको बोर्ड की तरफ से कोई वकालतनामा कभी नहीं दिया गया.’’
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असली दावेदार को छुपाकर लड़ाई लड़ी जा रही
उन्होंने कहा, ‘‘यह जांच का विषय है कि शिया वक्फ बोर्ड यानी असली दावेदार को छुपाकर लड़ाई लड़ी जा रही थी. मैंने राज्य सरकार और केन्द्र सरकार से दरख्वास्त की है कि इस मुद्दे की जांच जरूर की जाए कि शिया वक्फ बोर्ड की तरफ से फर्जी वकील किसके कहने पर खड़ा किया गया. जब शिया वक्फ बोर्ड ने अपना वकील ना उच्च न्यायालय में खड़ा किया और ना उच्चतम न्यायालय में खड़ा किया तो शिया वक्फ बोर्ड के जो वकील खड़े थे, उनको किसने अधिकृत किया. यह सबसे बड़ा जांच का विषय है.’’ रिजवी ने बताया कि उन्होंने अयोध्या विवाद के हल के लिए शिया वक्फ बोर्ड द्वारा तैयार किया गया समझौता प्रस्ताव गत 18 नवंबर को उच्चतम न्यायालय में दाखिल कर दिया है. उन्होंने दावा किया कि शिया वक्फ बोर्ड की तरफ से जो फार्मूला पेश किया गया है वह दुनिया का सबसे बेहतरीन फार्मूला है.
इस बीच, बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के संयोजक जफरयाब जीलानी ने ‘भाषा’ से कहा कि रिजवी फर्जी वकील खड़ा करने का आरोप लगा रहे हैं. वही पता करें कि आखिर वे वकील कौन थे और उन्हें किसने खड़ा किया था. विभिन्न अदालतों में पैरवी के दौरान कम से कम उन्हें तो शिया वक्फ बोर्ड का कोई वकील नहीं दिखायी दिया.




