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गोमिया-सिल्ली उपचुनाव : कुरमी बहुल इलाके में कुरमी उम्मीदवार, कुरमी वोटरों को रिझाने में अपना रहे हैं हर कुरमियाना तरीका 

Akshay Kumar Jha
Ranchi: गोमिया-सिल्ली उपचुनाव को देखते हुए महाभारत का वो वाक्या सामने आ जाता है जब अर्जुन ने यह देखते हुए अपने हथियार डाल दिये थे कि आखिर कैसे वो अपने ही लोगों पर बाण चलाये, क्योंकि लड़ाई भाई-भाई के ही बीच हो रही थी. वैसी ही कुछ स्क्रिप्ट गोमिया-सिल्ली उपचुनावों की भी है. दोनों विधानसभा क्षेत्र कुरमी बहुल क्षेत्र हैं. यहां ज्यादातर उम्मीदवार कुरमी जाति के होंगे,  जो अपनी जाति के वोट के दम पर चुनाव जीतने के लिए मैदान में होंगे. जीत या हार का पता तो चुनाव के बाद चलेगा,  लेकिन चुनाव से पहले अलग-अलग समीकरण देखने को मिल रहे हैं. कुरमी उम्मीदवार इस फिराक में हैं कि कैसे क्षेत्र के सारे कुरमी वोट उन्हें मिल जायें, वहीं गैर कुरमी उम्मीदवार इस फिराक में हैं कि कैसे कुरमी-कुरमी का वोट आपस में कट जाये और उनकी निकल पड़े. 

सिल्ली का चुनाव @ कुरमी फ्लेवर

मनवलमनवल

सिल्ली विधानसभा क्षेत्र कुरमी बहुल इलाका है. पिछली बार कुरमी घमासान के बीच कुरमी जाति के अमित महतो ने अपनी ही जाति के आजसू के दिग्गज सुदेश महतो को हराया था. पिछले चुनाव की बात करें तो सिल्ली विधानसभा में कुल 1,43,156 वोट पड़े थे. अमित महतो को 79,747 वोट मिले थे और सुदेश महतो को 50,007 वोट. जीत का अंतर काफी बड़ा था. अमित महतो ने 29,740 वोटों से सुदेश महतो को पटखनी दी थी. चुनावी आंकड़े को खूब खंगालने के बाद यह बात सामने आयी की सिल्ली में 33 से 35 फीसदी वोट कुरमी समुदाय के हैं. यानि करीब 50,000 वोट. इसी समुदाय पर सभी उम्मीदवारों की नजर है. 

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सिल्ली के उम्मीदवार @कुरमी फ्लेवर

नवपलनवपसल

सिल्ली में उम्मीदवारों की लिस्ट भी कुरमी फ्लेवर  वाली है. जीत किसी एक कुरमी की ही तय है और हार बाकी ज्यादातर कुरमियों की. इस सीट पर आजसू की तरफ से पार्टी सुप्रीमो सुदेश महतो खुद किस्मत आजमा रहे हैं. चूंकि इस चुनाव में गठबंधन धर्म तेल लेने के लिए जाने वाला है,  इसलिए बीजेपी ने भी लगभग अपना उम्मीदवार तय कर दिया है. इस सीट पर बीजेपी की तरफ से सांसद राम टहल चौधरी के बेटे रंजीत चौधरी किस्मत आजमा सकते हैं. या फिर पार्टी सुशील महतो पर भी मन बना सकती है. वो हिंदू जागरण मंच से भी जुड़े हुए हैं. अगर महागठबंधन हो तो भी, और अगर ना हो तो भी. जेएमएम की तरफ से अमित महतो अपनी मां या पत्नी को उम्मीदवार बना सकते हैं. यानि तीनों जीत के दावेदार कुरमी जाति से ही हैं. 

गोमिया का चुनाव @कुरमी फ्लेवर

मुलिुल

गोमिया विधानसभा भी कुरमी बहुल इलाका है. पिछली बार कुरमी वोट में सेंधमारी ना होने का पूरा फायदा योगेंद्र महतो को मिला था. 2014 के विधानसभा चुनाव में गोमिया विधानसभा में कुल 1,77,018 वोट पड़े. योगेंद्र महतो को 97,799 वोट आये थे और बीजेपी के माधव लाल सिंह को 60,2,85 वोट मिले थे. पहली बार माधव लाल सिंह को इतने वोट मिले थे, लेकिन वो फिर भी दूसरे नंबर पर रहे. कारण था कुरमी और मुस्लिम का एक मुश्त वोट योगेंद्र महतो के खाते में चला जाना. चुनावी आंकड़े को खंगालने पर पता चला कि गोमिया में भी कुरमी वोटरों की संख्या 33-35 फीसदी है. यानि करीब 62,000 वोट कुरमी समाज के हैं. ऐसे में सभी उम्मीदवारों की नजर इसी जाति विशेष पर हैं.

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गोमिया के उम्मीदवार @कुरमी फ्लेवर

्िव्िुव

अगर पूर्व मंत्री माधव लाल सिंह की बात छोड़ दी जाये तो सिल्ली की ही तरह गोमिया विधानसभा क्षेत्र में भी उम्मीदवारों की फेहरिस्त में कुरमी उम्मीदवार ज्यादा हैं. पिछली बार दूसरे नंबर पर रहे माधव लाल सिंह पर अगर बीजेपी भरोसा नहीं जताती है,  तो छत्रुराम महतो या फिर गुणानंद महतो को बीजेपी का टिकट मिलना तय माना जा रहा है. इधर देवनारायण प्रजापति और लक्ष्मण नायक भी रेस में हैं. लेकिन उपचुनाव के मद्देनजर दोनों ने अपने आप ही चुप्पी साध रखी है. अपना दम अगले चुनाव के लिए बचा कर रखा है. वहीं आजसू की बात करें तो लंबोदर महतो अपने आप को गोमिया विधानसभा के लिए तैयार कर चुके हैं. जेएमएम की तरफ से योगेंद्र महतो अपनी पत्नी बबीता देवी को उतारने की तैयारी कर चुके हैं. यहां तक कि पोस्टर और बैनर की डिजाइनिंग भी हो चुकी है. 

लेकिन यह राजनीति है, यहां फ्लेवर से ज्यादा कलेवर चलता है…
2014 विधानसभा चुनाव से पहले 2009 के चुनाव के जो आंकड़े थे, उसे देख कर शायद ही 2014 के चुनावी नतीजों का अंदाजा लगाया जा सकता था. कहीं वही हाल इस बार भी ना दोहराते हुए दिखे. 2009 में गोमिया से माधव लाल सिंह कांग्रेस पार्टी से मौदान में थे. उन्हें सिर्फ 31,540 वोट मिले थे और वो जीत गये थे. दूसरे नंबर पर रहे योगेंद्र महतो को सिर्फ 23,237 वोट मिले थे. जो 2014 के विधानसभा में बदल कर 97,799 हो गये थे. वहीं सिल्ली की बात करें तो 2009 में अमित महतो ने जेवीएम के टिकट पर चुनाव लड़ा था और वो 37,966 वोट पर ही सिमट गये थे. आजसू के सुदेश महतो को उस चुनाव में जीत के लिए 45,673 वोट मिले जो 2014 में 50,007 हुए. लेकिन इस बार वो जेएमएम के टिकट पर चुनाव लड़ रहे अमित महतो से 29,740 वोट से हार गये थे, क्योंकि अमित को इस बार 79,747 वोट मिले थे.

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