
Palamu: पलामू की धरोहर माने जानेवाली जपला फैक्ट्री आज नीलामी के कगार पर पहुंच चुकी है. और इसकी प्रक्रिया भी शुरु हो गयी है. रविवार को पटना हाईकोर्ट के आदेश पर प्लांट और मशीनरी की नीलामी की निविदा प्रकाशित की गई. इस फैक्ट्री के प्लांट और मशीनरी की आरक्षित कीमत 11.26 करोड़ से कुछ ज्यादा रखी गई है. फैक्ट्री के नौहट्टा स्थित प्लांट और मशीन की कीमत 1.68 करोड़ से कुछ अधिक तय की गई है. 16मई तक टेंडर जमा होंगे, वही 17 मई को पटना हाईकोर्ट के न्यायाधीश के सामने निविदा खोली जाएगी.
गौरतलब है कि इससे पहले कर्ज वसूली न्यायाधिकरण पटना ने फरवरी 2016 में फैक्ट्री की नीलामी की ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू की थी, लेकिन कोई खरीदार नहीं आया. उस समय फैक्ट्री की 410 एकड़ जमीन की भी नीलामी होनी थी. इस बार जमीन की नीलामी नहीं हो रही है.
बिक्री के लिए दो भागों में निविदा
सूचना के मुताबिक पलामू जिले के हुसैनाबाद प्रखंड अंतर्गत जपला सीमेन्ट कारखाना की बिक्री के लिये दो भागों में निविदा आमंत्रित की गयी है. पहले भाग में जपला स्थित प्लांट एवं मशीनरी की कीमत 11 करोड़ 26 लाख 46 हजार 252 रुपये सुरक्षित रखे गये हैं, जिसमें आग्रिम राशि एक करोड़ 68 लाख 96 हजार 968 रुपये बैंक ड्राफ्ट के जरिए पहले जमा करने है. दूसरे भाग में बिहार के नौहट्टा थाना क्षेत्र में बौलिया स्थित प्लांट एवं मशीनरी है, जिसकी कीमत एक करोड़ 68 लाख 38 हजार 110 रुपये सुरक्षित राशि निर्धारित की गयी है. इसमें अग्रधन की राशि 25 लाख 25 हजार 717 रुपये है.
चुनावी मुद्दा रही जपला सीमेंट फैक्ट्री
ये पलामू जिले का दुर्भाग्य ही है कि 1920 में स्थापित जपला सीमेंट कारखाना महज चुनावी मुद्दा बनकर रह गयी. झारखंड अलग राज्य बनने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा और मधु कोड़ा ने फैक्ट्री का जायजा लिया था लेकिन कारखाना खुलवाने की कोई सार्थक पहल नहीं हुई. हेमंत सोरेन के कार्यकाल में तो इसकी चर्चा तक नहीं हुई. वही लोकसभा एवं विधानसभा 2014 के चुनाव प्रचार में मेदिनीनगर में नरेंद्र मोदी और हुसैनाबाद में राजनाथ सिंह ने घोषणा की थी कि केंद्र में भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनेगी तो जपला सीमेंट कारखाना चालू करने का प्रयास किया जायेगा. लेकिन ये मात्र घोषणा बनकर रह गयी. लोकसभा चुनाव के समय सांसद वीडी राम ने भी घोषणा की थी कि कारखाना चालू कराना उनकी पहली प्राथमिकता होगी। सत्तासीन भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री रघुबर दास ने भी जपला सीमेंट फैक्ट्री को फिर से खोलने की घोषणा की थी. लेकिन हकीकत ये है कि सीएम फैक्ट्री खुलवाने की बाच करते हैं, जबकि पटना हाईकोर्ट इसकी नीलामी की तैयारी कर चुकी है.
इसे भी पढ़ेंःमुख्य सूचना आयुक्त का आदेश : NTPC जमीन अधिग्रहण से संबंधित दस्तावेज अधिवक्ता सत्य प्रकाश को दिखायें
बता दें कि फैक्ट्री की स्थापना 1920 में डालमिया समूह ने की थी. फैक्ट्री को 1980 में बंद किया गया. पांच साल बाद 25.44 करोड़ का कर्ज देकर इसे दोबारा चालू किया गया, लेकिन प्रबंधन ने 28 मई, 1992 में इसे बंद कर दिया. उस वक्त 14 सौ स्थायी कर्मचारी काम कर रहे थे. अभी फैक्ट्री पर पंजाब नेशनल बैंक, आईडीबीआई और मेसर्स फोनिक्स एआरसीप्रालि का लगभग 450 करोड़ रुपये बकाया है.
न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.




