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NAVRATRI SPECIAL

सप्तम कालरात्रिः काल का नाश करती हैं मां

डॉ. स्वामी दिव्यानंद जी महाराज (डॉ. सुनील बर्मन) श्री दुर्गा का सप्तम रूप श्री कालरात्रि हैं. ये काल का नाश करनेवाली हैं, इसलिए कालरात्रि कहलाती हैं. नवरात्रि के सप्तम दिन इनकी पूजा और अर्चना की जाती है. इस दिन साधक को अपना चित्त…

षष्ठी कात्यायनी माताः अमोद्य फलदायिनी हैं देवी कात्यायनी

डॉ. स्वामी दिव्यानंद जी महाराज (डॉ. सुनील बर्मन) श्री दुर्गा का षष्ठम् रूप श्री कात्यायनी. महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर आदिशक्ति ने उनके यहां पुत्री के रूप में जन्म लिया था. इसलिए वे कात्यायनी कहलाती हैं. नवरात्रि के षष्ठम…

पंचम स्कंदमाताः मनुष्य को सुख-शांति की प्राप्ति होती है

डॉ. स्वामी दिव्यानंद जी महाराज (डॉ. सुनील बर्मन) श्री दुर्गा का पंचम रूप श्री स्कंदमाता हैं. श्री स्कंद (कुमार कार्तिकेय) की माता होने के कारण इन्हें स्कंदमाता कहा जाता है. नवरात्रि के पंचम दिन इनकी पूजा और आराधना की जाती है. इनकी आराधना…

योगी सरकार के मंत्री का दावा: अगले लोकसभा चुनाव में बीजेपी की हार तय

Baliya: उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ भाजपा की सहयोगी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष और राज्य सरकार के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने शनिवार को कहा कि लोकसभा के आगामी चुनाव में भाजपा की पराजय होनी तय है. इसे भी…

तृतीय चन्द्रघंटाः सांसारिक कष्टों से मुक्ति दिलाती हैं माता

डॉ. स्वामी दिव्यानंद जी महाराज (डॉ. सुनील बर्मन) श्री दुर्गा का तृतीय रूप श्री चंद्रघंटा है. इनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है, इसी कारण इन्हें चंद्रघंटा देवी कहा जाता है. नवरात्रि के तीसरे दिन इनका पूजन और अर्चना किया जाता…

द्वितीय ब्रम्हचारिणी : तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार, संयम की वृद्धि करती हैं मां

डॉ. स्वामी दिव्यानंद जी महाराज (डॉ. सुनील बर्मन) नवरात्र के दूसरे दिन माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना का विधान है. देवी दुर्गा का यह दूसरा रूप भक्तों एवं सिद्धों को अमोघ फल देने वाला है. देवी ब्रह्मचारिणी की उपासना से तप,  त्याग,  …

प्रथम शैलपुत्रीः स्थिरता का प्रतीक हैं मां

डॉ. स्वामी दिव्यानंद जी महाराज (डॉ. सुनील बर्मन) नवरात्रि के पहले दिन मां की पूजा की जाती है. शैलपुत्री हिमालय पर्वत की पुत्री हैं. पूर्वजन्म में ये राजा दक्ष की पुत्री और भगवान शिव की पत्नी थीं. तब इनका नाम सती था. एक बार प्रजापति दक्ष…
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