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MNREGA: 3 महीने से भुगतान नहीं होने से कर्मियों से लेकर श्रमिक तक बेहाल, पैसे के अभाव में टूट रही कमर

Ranchi. कोरोना संकट ने मनरेगा मजदूरों के सामने गहरी चुनौती खड़ी कर दी है. यह चौतरफा संकट बनकर आया है. स्वास्थ्यगत सवालों के साथ साथ पैसे की तंगी ने जीना मुहाल कर दिया है. एक से तीन महीने हो गये, मजदूरों के साथ साथ मनरेगा के कर्मियों (मुख्यालय) तक का पेमेंट नहीं हो सका है.

श्रमिक काम करने को तैयार, पर नहीं मिलती है मजदूरीः

राज्यभर के अलग-अलग जिलों से यह शिकायत लगातार उठ रही कि मनरेगा में श्रमिक काम तो करने को तैयार हैं पर काम के बाद भुगतान की व्यवस्था लचर है. 30 से 100 दिन बीतने के बावजूद मजदूरी भुगतान नहीं हो सका है. सांसद गीता कोड़ा, विधायक सुदेश कुमार महतो सहित कई जनप्रतिनिधियों ने सीएम के साथ पिछले दिनों हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान इस विषय को उठाया भी था. मनरेगा से जुड़े संगठन भी बार बार इस पर सरकार का ध्यान आकृष्ट करा रहे हैं.

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हर गांव में 6 स्कीम पर काम का प्रेशर

पिछले दिनों ग्रामीण विकास विभाग ने हर जिले के डीडीसी, बीडीओ के साथ ऑनलाईन बैठक की थी. इसमें हर गांव में 6 स्कीम पर काम कराये जाने और अधिक से अधिक लोगों को काम से जोड़ने की बात कही थी. विभाग मानता है कि लॉकडाउन में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संवारने को मनरेगा सबसे अहम है. पर मुश्किल यह है कि डेढ़ महीने से अधिक समय से कई जगहों पर पेमेंट फंसा हुआ है. मनरेगा के 5000 कर्मियों के वेतन भुगतान का भी मसला अटका पड़ा है.

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मनरेगा कर्मी संघ ने चिटठी लिखकर मांगी राहत

मनरेगा कर्मी संघ ने चिटठी लिखकर राहत भी मांगी है. पर ग्रास रूट पर मजदूरों को पेमेंट नहीं होने से समस्या बढ़ रही है. लेबर को पैसा नहीं मिलने पर मनरेगा के लक्ष्य को हासिल करने में कठिनाई आ रही. लॉकडाउन की मार और ऊपर से भुगतान नहीं होने से श्रमिकों के सामने खाने पीने तक की दिक्कत आ गयी है. उधारी तक मिलना कठिन है.

केस 1:

चाईबासा में सोनुआ प्रखंड के मनरेगा मज़दूरों का मज़दूरी भुगतान एक माह से अधिक से लंबित है. यही सूचना ज़िला के अन्य प्रखंडों से भी आ रही हैं. लॉकडाउन के दौरान मज़दूरों को समय पर भुगतान न मिलने के कारण उनकी आर्थिक समस्याएं और गंभीर हो रही हैं. प्रखंड के पोड़ाहाट गाँव के मनरेगा मज़दूर लंबित मज़दूरी की शिकायत करने प्रखंड भी गए थे लेकिन कोई मनरेगा कर्मी उपस्थित नहीं रहने के कारण शिकायत जमा नहीं हो पाया. 2 अप्रैल को किए काम का भुगतान अभी तक नहीं हुआ है. चाईबासा डीसी और सीएम हेमंत सोरेन को ट्वीट करके मदद मांगी गयी है.

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केस-2:

रांची के बुंडू ब्लॉक में 21 मार्च को ही कुछ श्रमिकों का पैसा आया. कईयों का बाकी रहा. इसके बाद से पेमेंट रुका ही पड़ा है. वे बार बार मनरेगा कर्मियों से पेमेंट का आग्रह कर रहे. फिलहाल मजबूरीवश वे मनरेगा कर्मियों के आश्वासन के सहारे काम कर रहे हैं. केवल बुंडू में ही अभी तक 30 लाख से अधिक का भुगतान लंबित है.

लगातार बढ़ रही डिमांड

मनरेगा के रिकॉर्ड के अनुसार देखें (14 मई) तो राज्य में लगातार काम की डिमांड बढ़ रही है. अप्रैल महीने में 2-3 लाख की तुलना में अभी श्रमिकों की संख्या लगभग 6 लाख 52 हजार तक पहुंच गयी है. इनमें सबसे अधिक संख्या दुमका की है जहां 59 हजार 568 श्रमिक कार्यरत हैं. देवघर में भी तकरीबन इतने ही लोग हैं. गढवा में 65 हजार तो रांची में 23 हजार 670 श्रमिक कार्यरत हैं.

संख्या तो लगातार बढ़ती जा रही है पर पिछला पेमेंट नहीं होने से बदहाली भी बढ़ती जा रही है. मार्च महीने से 225 रुपये मनरेगा मजदूरी भुगतान होना है, यह अब तक नहीं पो पाया है. मनरेगा के लिये मुख्यालय स्तर पर 76 कर्मी कार्यरत हैं. इसी तरह क्षेत्रीय स्तर पर 6200 मनरेगा कर्मी (जे इ, ए इ, रोजगार सेवक, कंप्यूटर ऑपरेटर) के लिये हर महीने 9 करोड़ से अधिक रुपये उनके मानदेय पर व्यय होता है. फिलहाल यह भी नहीं हो रहा.

क्या कर रहा विभाग

ग्रामीण विकास विभाग ने अप्रैल महीने में एजी को लेटर लिखा. इसमें कहा है कि वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिये 98197.27 लाख रुपये रिलीज करें और स्वीकृति दें. 2007-08 से राज्य के सभी जिलों में मनरेगा का लाभ दिया जा रहा है. स्वीकृत राशि मनरेगा अंतर्गत निर्मित Perspective Plan और वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिये अनुमोदित एनुअल प्लान के अंतर्गत शामिल योजनाओं के कार्यान्वयन पर व्यय किया जायेगा.

स्वीकृत राशि की निकासी के बाद राशि को राज्य स्तर पर संधारित e-FMS खाते (सामग्री और प्रशासनिक मद का भुगतान) तथा राज्य रिवॉल्विंग फंड के खाते में भेज दिया जायेगा. अब तक इस दिशा में आगे काम नहीं होने से मजदूरी भुगतान और वेतनमान लंबित पड़ा हुआ है.

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