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मालेगांव ब्लास्टः सांसद प्रज्ञा के नाम से रजिस्टर्ड बाइक को पंचनामा करनेवाले गवाह ने पहचाना

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New Delhi: मालेगांव ब्लास्ट में आरोपी सांसद प्रज्ञा ठाकुर की मुश्किलें बढ़ सकती है. दरअसल, इस बम धमाके में कथित तौर पर विस्फोटक लगाने के लिए इस्तेमाल एलएमएल फ्रीडम मोटरसाइकिल को गवाह ने पहचान लिया है. सोमवार को पहली बार इसे ट्रायल कोर्ट में लाया गया.

एलएमएल फ्रीडम बाइक प्रज्ञा सिंह ठाकुर के नाम पर रजिस्टर्ड है. मोटरसाइकिल धमाके वाली जगह पर क्षतिग्रस्त अवस्था में मिली थी. गौरतलब है कि इस मामले में आरोपी भोपाल से बीजेपी सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर अभी बेल पर हैं.

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दो बाइक की पहचान

ब्लास्ट वाली जगह पर पंचनामा करने वाले गवाह ने दो मोटरसाइकिलों की पहचान की. इनमें से एक बाइक एलएमएल है, वहीं दूसरी बाइक होंडा यूनिकॉर्न है.

गवाह को सोमवार को इन मोटरसाइकिलों के अलावा पांच साइकिलें भी दिखाई गईं. गवाह के मुताबिक, ये वही बाइक और साइकिलें हैं जो उसने 2008 में घटनास्थल पर देखी थी.

गौरतलब है कि दो बाइक और पांच साइकिलों को मालेगांव के भीखू चौक से बरामद किया गया था, जिसे ट्रायल में सबूत के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है.

धमाके के बाद इन दो पहियों की जांच फॉरेंसिक साइंस लैबोरेट्री ने की और बाद में इन्हें महाराष्ट्र एंटी टेररिज्म स्क्वॉड (ATS) के पास भेज दिया गया. पहले इस मामले की जांच एटीएस ने ही की थी.

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दो बाइक और पांच साइकिलों की शिनाख्त

मुंबई की अदालत में जगह की कमी होने के कारण इन सबूतों को एटीएस के कलाचौकी यूनिट भेजा गया था. सुनवाई के दौरान सोमवार को इन सबूतों को एक ऑटो में लादकर कोर्ट लाया गया. साइकिल और मोटरसाइकिलों को पांचवें तल पर स्थित कोर्ट रूम तक नहीं लाया जा सकता था.

ऐसे में कोर्ट ने दोनों पक्षों के वकीलों को निर्देश दिया कि वो ग्राउंड फ्लोर पर जाकर इन सबूतों को देखें. स्पेशल जज वीएस पदलकर ने भी इन सबूतों का मुआयना किया.

गवाह ने ऑटो पर चढ़कर बाइक की पहचान की. जज भी मोटरसाइकिल का मुआयना करने के लिए ऑटो पर चढ़े.

उल्लेखनीय है कि अक्टूबर 2008 में हुए इस धमाके के मामले में पहली गिरफ्तारी साध्वी प्रज्ञा की हुई थी. यह गिरफ्तारी बाइक के रजिस्ट्रेशन के आधार पर हुई थी.

एटीएस के बाद मालेगांव ब्लास्ट की जांच कर रही एनआइए ने 2016 में दाखिल अपनी सप्लीमेंट्री चार्जशीट में कहा था कि प्रज्ञा उस बाइक को दो साल से ज्यादा वक्त से इस्तेमाल नहीं कर रही थीं. एनआईए ने प्रज्ञा को क्लीनचिट दी थी.

लेकिन कोर्ट ने एनआइए की दलील को खारिज करते हुए कहा था कि आरटीओ के रिकॉर्ड में बाइक प्रज्ञा के नाम पर रजिस्टर्ड है और यह ट्रायल का मामला है कि धमाके में इसके इस्तेमाल से प्रज्ञा का कनेक्शन है या नहीं?

गौरतलब है कि 29 सितंबर 2008 को हुए इस धमाके में 6 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 100 से ज्यादा लोग घायल हुए थे.

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