
Mumbai: महाराष्ट्र में सरकार बनाने को लेकर तस्वीर अबतक साफ नहीं हो पायी है. शिवसेना और भाजपा के बीच चल रही जबरदस्त रस्साकशी के बीच शिवसेना नेता संजय राउत ने गुरुवार को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी प्रमुख शरद पवार से मुलाकात की. जिसके बाद से राज्य में सरकार बनाने के एक नये विकल्प को लेकर अटकलों का बाजार गर्म हो गया है.
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राउत, पवार की मुलाकात से सियासी हलचलें तेज
गुरुवार को महाराष्ट्र में राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदले. एक ओर जब शिवसेना विधायक की बैठक हुई तो उम्मीद थी कि सरकार गठन को लेकर गतिरोध खत्म होगा, लेकिन बैठक के बाद संजय राउत जब शरद पवार से मिलने पहुंचे तो राजनीतिक हलचल और तेज हो गई.
Sanjay Raut, Shiv Sena: If Shiv Sena decides, it’ll get the required numbers to form stable government in the state. People have given mandate to form government on basis of 50-50 formula that was reached in front of people of Maharashtra.They want Chief Minister from Shiv Sena. pic.twitter.com/mFwLu7LbhV
— ANI (@ANI) November 1, 2019
हालांकि,शिवसेना नेता राउत ने बताया कि ये सिर्फ दिवाली की बधाई वाली मुलाकात थी.
हालांकि इन दोनों नेताओं के बीच मुलाकात में क्या विचार विमर्श हुआ, इस बारे में अभी तक कोई जानकारी सामने नहीं आयी है. किंतु इस मुलाकात ने राज्य में गैर भाजपा सरकार के गठन संबंधी विकल्प को लेकर अटकलें तेज हो गयी हैं.
याद दिला दें कि विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के दिन 24 अक्तूबर को भी राउत ने पवार से मुलाकात की थी किंतु शिवसेना सांसद ने इसे निजी मुलाकात करार दिया था.
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सरकार गठन पर उहापोह की स्थिति बरकरार
गौरतलब है कि भाजपा और शिवसेना के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर रस्साकशी काफी तेज हो गयी है. भाजपा जहां 105 सीट जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है. वहीं शिवसेना को 56 सीटें मिली हैं. राज्य में सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत 145 है.
हाल में हुए विधानसभा चुनाव में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को 54 और कांग्रेस को 44 सीटें मिली हैं.
शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे यह दावा करते आये हैं कि 2019 के चुनाव से पहले उनके, मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस और भाजपा प्रमुख अमित शाह के बीच हुई बैठक में एक फार्मूले पर सहमति बनी थी. इसके तहत तय हुआ था कि मुख्यमंत्री पद बारी बारी से दोनों पार्टियों को दिया जाएगा.
बहरहाल, भाजपा ने ऐसे किसी भी फार्मूले से स्पष्ट तौर पर मना किया है. पार्टी इस बात पर शुरू से बल देती आ रही है कि अगले पांच वर्ष तक फडणवीस ही मुख्यमंत्री पद पर बने रहेंगे.
किसान बनना चाहता है मुख्यमंत्री
एक ओर जहां सरकार गठन को लेकर बीजेपी-शिवसेना में मतभेद बरकरार है. वहीं महाराष्ट्र के बीड जिले का एक किसान सत्ता को लेकर भाजपा-शिवसेना के बीच मतभेद सुलझने और अगली सरकार का गठन होने तक राज्य का मुख्यमंत्री बनने की इच्छा जताई है.
केज तालुका के वडमौली निवासी किसान श्रीकांत विष्णु गडाले ने बीड कलेक्टर कार्यालय को गुरुवार को पत्र लिखकर अपनी इच्छा जाहिर की.
उन्होंने पत्र में लिखा,“शिवसेना और भाजपा 2019 विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद से मुख्यमंत्री पद को लेकर उठे मुद्दे को अब तक नहीं सुलझा पाई हैं. प्राकृतिक आपदाएं (बेमौसम बरसात) ने राज्य में पकी फसलों को नुकसान पहुंचाया है. किसान इन आपदाओं को लेकर परेशानी में हैं.”
किसान ने लिखा है, ‘इस वक्त जब किसान परेशान हैं, शिवसेना और भाजपा मुख्यमंत्री पद के मुद्दे को सुलझा पाने में अक्षम हैं तो इसलिए मुद्दा सुलझने तक राज्यपाल को मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी मुझे दे देनी चाहिए.’ गडाले ने कहा, “मैं किसानों की समस्या सुलझाऊंगा और उन्हें न्याय दूंगा.”
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