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Hazaribagh, 03 September : झारखंड से होकर गुजरे एनएच 02 के सिक्स लेन चौड़ीकरण प्रक्रिया में अनियमितता को लेकर सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय भारत सरकार को पत्र लिखा गया है. पत्र हजारीबाग विनोबा भावे विश्वविद्यालय के लॉ के छात्र व बरही निवासी संजय मेहता ने लिखा. पत्र में उन्होंने मुआवजा प्रक्रिया में व्यापक अनियमितता को लेकर शिकायत की थी. मंत्रालय को 09 अगस्त 2017 को लिखे गए पत्र में उन्होंने कहा था कि झारखंड से गुजरे एनएच 02 के सिक्स लेन चौड़ीकरण के मुआवजा भुगतान प्रक्रिया में जमीन मालिकों को परेशान किया जा रहा है. उन्होंने शिकायत दर्ज कराते हुए कहा था कि पदाधिकारियों द्वारा व्यापक स्तर पर वित्तीय अनियमितता को अंजाम दिया गया है. पत्र में लिखा था कि झारखंड के हजारीबाग, गिरिडीह, बोकारो और धनबाद जिले से गुजरी एनएच 02 के सिक्स लेन चौड़ीकरण में संबंधित जिले के प्रभावित जमीन मालिकों को सम्पति के अनुपात में उचित मुआवजा नहीं दिया गया है.
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने लिया संज्ञान
संजय मेहता की शिकायत पर सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय भारत सरकार ने संज्ञान लिया है. मंत्रालय ने इस बाबत सत्येंद्र कुमार, महाप्रबंधक एवं परियोजना निदेशक, धनबाद से जवाब तलब किया है. टीडीएस रिटर्न फाइल नहीं कर पा रहे रैयत एनएच 02 चौड़ीकरण में जिन लोगों को मुआवजा की राशि प्राप्त हो चुकी है उनके मुआवजा से दस प्रतिशत की टीडीएस राशि काटी गयी है. टीडीएस कटौती के बाद रिटर्न फाइल करने के लिए फॉर्म 16 भी जमीन मालिकों को जारी कर दिया गया है. लेकिन टीडीएस कटौती को फॉर्म 26 में अपडेट नहीं किया गया है. फॉर्म 26 में 10 प्रतिशत टीडीएस कटौती का जिक्र नहीं होने के कारण रैयतों की करोड़ों की राशि फंस गयी है. रैयत टीडीएस का रिटर्न दाखिल नहीं कर पा रहे हैं. टीडीएस रिटर्न फाइल करने की समय सीमा निश्चित होती है. नियमानुसार समय सीमा बीत जाने के बाद टीडीएस का रिटर्न फाइल मान्य नहीं होता है. ऐसे में रैयत अपनी राशि को लेकर चिंतित हैं.
हजारीबाग डीसी ने दिया था आश्वासन
हजारीबाग जिले के प्रभावित लोगों की इस समस्या को लेकर 10 अगस्त 2017 को संजय मेहता ने हजारीबाग उपायुक्त रविशंकर शुक्ला से मुलाकात कर पूरी समस्या को रखा था. उपायुक्त ने इस संदर्भ में हजारीबाग के अतिरिक्त भू-अर्जन पदाधिकारी को आदेश भी दिया था. समस्या के समाधान की बात कही गयी थी. लेकिन अबतक इस समस्या का समाधान नहीं किया गया है.
क्या कहते हैं संजय मेहता
इस संदर्भ में छात्र संजय मेहता ने कहा कि विस्थापित भू-स्वामियों के साथ गलत किया जा रहा है. एनएच 02 फोर लेन चौड़ीकरण में रैयत एक बार विस्थापित हो चुके हैं. दूसरी बार सिक्स लेन चौड़ीकरण में पुनः विस्थापित हो रहे हैं. ऐसे में सरकार को संवेदनशीलता दिखानी चाहिए थी. लेकिन रैयतों की समस्या को सभी लोगों ने दरकिनार कर दिया है. रैयत ऑफिस के चक्कर लगाकर परेशान हैं. उनकी समस्या पर किसी का ध्यान नहीं है. सही मुआवजा और हक दिलाने का प्रयास जारी है. मंत्रालय के संज्ञान लेने से न्याय की उम्मीद जगी है.




