रायपुर: छत्तीसगढ़ में नागलोक से विख्यात जशपुर जिला अब विदेशों में सांपों की प्रजातियों को लेकर अपनी साख बिखेर रहा है। इस जिले में सांप के साथ अन्य वन्य जीवों के संरक्षण के क्षेत्र में कार्य वाली संस्था ग्रीन नेचर वेलफेयर (जीएनडब्ल्यूएस) ने अपने फेसबुक के जरिए नागलोक के बारे में जानकारियां साझा की है, जिसे देखकर जर्मनी के दो सर्प विशेषज्ञ मर्लिन (19 साल) और मैथियस (29 साल) निजी प्रवास पर जशपुर पहुंचे हैं।
दोनों विशेषज्ञ यहां विगत 18 अगस्त से ही हैं। वे जीएनडब्ल्यूएस द्वारा किए जा रहे रेस्क्यू और जशपुर में विभिन्न प्रकार के सांपों के बारे में जानकारियां ले रहे हैं। जर्मनी के विशेषज्ञ ऑफ फेंग स्टेशन फॉर रेपटेलियन संस्था के हैं।
जीएनडब्ल्यूएस के कैसर हुसैन ने दूरभाष पर बताया कि उनकी संस्था सांपों के रेस्क्यू, सर्पदंश से जुड़ी लोगों के मन में भ्रांतियांए, अंधविश्वास और अन्य वन्य जीवों के संरक्षण की दिशा में विगत 6 वर्षो से कार्य कर रही है। उनकी संस्था में राहुल तिवारी, अजय शंकर भगत, राकेश मिश्रा सहित अन्य सदस्य काम कर रहे हैं।
कैसर ने बताया कि फेसबुक के जरिए जर्मनी के सर्प विशेषज्ञ को जरिए यहां की जानकारी मिले तो वे सीधे जशपुर पहुंच गए। मर्लिन और मैथियस ने दुर्लभ ग्रीन पीट वाइपर स्नैक के संबंध में जानकारी ली। वे इस ग्रीन पीट वाइपर का बल्ड सैंपल जर्मनी ले जाना चाहते हैं।
कैसर ने बताया कि जर्मनी के ये दोनों विशेषज्ञ सांपों के अध्ययन करने श्रीलंका सहित अन्य देशों का भ्रमण कर चुके हैं। कैसर का कहना है कि यदि शासन से जर्मनी के विशेषज्ञों को नागलोक के बारे में अध्ययन करने की अनुमति मिलेगी तो वे यहां काम करने के इच्छुक हैं।
इस दौरान जर्मनी के इन विशेषज्ञों ने यहां गांव और जंगलों का निरंतर भ्रमण कर अपने अनुभव साझा कर रहे हैं। साथ ही जीएनडब्ल्यूएस के सदस्यों द्वारा की जा रही सांपों के संरक्षण की दिशा में प्रयास और जागरूकता को देख रहे हैं।
कैसर ने बताया कि भाषा से हो रही परेशानियों को देखते हुए उनकी टीम के अनुज सिन्हा और मानंद विश्वकर्मा उनकी मदद कर रहे हैं। विशेषज्ञों ने बताया कि जर्मनी में सांपों को पालन का भी प्रचलन है।
गौरतलब है कि जशपुर जिले में कोबरा और करैत की सबसे जहरीली प्रजाति पाई जाती है। यह जिला ‘नागलोक’ के नाम से भी जाना जाता है। छत्तीसगढ़ और झारखंड की सीमा पर स्थित जशपुर जिले के आदिवासी बहुल इलाके में आठ विकासखंड हैं और बरसात होते ही सांपों के जोड़े यहां उन्मुक्त विचरण करने लगते हैं।
यह इलाका ऐसा है, जिसकी जलवायु और मिट्टी सांपों के लिए सर्वाधिक अनुकूल है। नागलोक और उससे लगे इलाके में सांपों की 70 से ज्यादा प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें कोबरा की चार और करैत की तीन अत्यंत विषैली प्रजातियां भी शामिल हैं।




