
Ranchi: राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार ने केंद्रीय मंत्री अनंत गीते से एचईसी को बचाने की मांग पत्र लिखकर की है. इसके साथ ही उन्होंने उन चर्चाओं पर भी विराम लगाने का आग्रह किया है कि एचईसी को निजी कंपनियों को सौंपा या बेचा जायेगा. झारखंड के राज्यसभा सांसद श्री पोद्दार ने इस मामले में वस्तुस्थिति और सरकार की भावी योजना सार्वजनिक करने का भी आग्रह किया है.
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भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रख पुनरुद्धार के लिए उठायें कदम
भारत सरकार के भारी उद्योग तथा सार्वजनिक उद्यमिता मंत्री श्री गीते को लिखे पत्र में कहा है कि भारत सरकार इस एचईसी की रोजगार देने की क्षमता, औद्योगिक उत्पादन का समृद्ध अनुभव और भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुये इसके पुनरुद्धार के लिए आवश्यक कार्रवाई करे. अपने पत्र में यह भी कहा है कि विगत कुछ दिनों से एचईसी को निजी कंपनियों को सौंपे जाने की चर्चा के बाद श्रमिकों, स्थानीय निवासियों व राजनीतिक संगठनों से जुड़े कई समूह आंदोलित हैं. यथाशीघ्र इस मामले में स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिये, ताकि अटकलों पर विराम लग सके.
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रेल मंत्री को एचईसी में कोच निर्माण शुरु करने का दिया सुझाव
श्री पोद्दार ने एचईसी की टीम से बात कर उन्हें सुझाव दिया है कि इतने बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग कुछ ऐसे उत्पादों के निर्माण में किया जाये, जिनका उत्पादन लगातार संभव हो और उसके लिए एक समान उत्पादन प्रक्रिया अपनाने की जरुरत हो. रेलवे कोच, स्टील ब्रिज आदि का अनवरत उत्पादन बेहतर विकल्प हो सकते है. श्री पोद्दार ने रेल मंत्री से भी एचईसी में रेलवे का कोई उपक्रम जैसे विशेष कोच निर्माण शुरू करने का सुझाव दिया है, जो उनके मंत्रालय के विचाराधीन है. अपने पत्र में श्री पोद्दार ने कहा है कि एचईसी की टीम कई देशों का भ्रमण कर लौटी है, कई नई– नई कंपनियों के लिए नए– नए प्रोडक्ट के उत्पादन की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं और इन प्रयासों को सफलताएं मिलती दिख भी रही हैं.
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एचईसी को भी करने पड़ेंगे आवश्यक बदलाव
एचईसी की स्थापना 1960 के दशक में हुयी. इस संयंत्र की डिजाइन, तकनीक, मशीनें आदि उस वक्त की जरूरतों के अनुरूप ही हैं, लेकिन पिछले पांच– छह दशकों में काफी चीजें बदली हैं. उत्पाद की गुणवत्ता महत्वपूर्ण हो गयी है, प्रतियोगिता बढ़ गयी है और उत्पादन-आपूर्ति के लिए समय भी बहुत कम दिया जाता है. अतः वक्त की मांग को देखते हुये एचईसी को भी आवश्यक बदलाव करने पड़ेंगे.
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नीति आयोग की राय भी एचईसी के हित में
श्री पोद्दार ने कहा कि नीति आयोग ने भी एचईसी की वर्तमान स्थिति और भविष्य की संभावनाओं का अध्ययन किया है. नीति आयोग की राय भी एचईसी के बारे में सकारात्मक ही है.एचईसी प्रबंधन ने पुनरुद्धार के लिए 2300 करोड़ रुपये का पैकेज मांगा है. इस संस्थान के पास जितना बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर है, उसके अनुरूप यदि ठोस कार्ययोजना हो, तो यह निवेश करना उचित प्रतीत होता है.
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‘मेक इन इंडिया’ अभियान को गति देने में सहायक हो सकता है एचईसी
उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में एचईसी की कार्यसंस्कृति सकारात्मक दिशा में बदली है, राजनीतिक हस्तक्षेप भी काफी कम हुआ है. राज्य सरकार भी रोजगार प्रोत्साहन के लिए कई तरह की नकद सब्सिडी दे रही है, जो की राज्य सरकार एचईसी को भी दे सकती है और भागीदारी निभा सकती है. एचईसी ने समय– समय पर विभिन्न रक्षा उपकरणों का निर्माण कर इस क्षेत्र में अपनी दक्षता प्रमाणित की है. रक्षा उपकरणों के निर्माण के मामले में एचईसी प्रधानमंत्री के ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को गति देने में सहायक सिद्ध हो सकता है. नीतिगत रूप से भी रक्षा एवं अन्य विशेष उपकरणों के निर्माण के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम ही ज्यादा उपयुक्त हो सकते हैं.
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