
Bengaluru : कर्नाटक में सियासी घमासान जारी है. राज्य की कांग्रेस और जेडीएस सरकार की किस्मत का फैसला मंगलवार को हो जाएगा. बेंगलुरु से बाहर गए 11 विधायकों के इस्तीफे स्वीकार होते हैं या नहीं, इस बात का फैसला हो जाएगा.
विधायकों के इस्तीफे के बाद यह घमासान अब कर्नाटक ही नहीं महाराष्ट्र से लेकर दिल्ली और गोवा तक फैल गया है. दरअसल, मुंबई के एक होटल में जनता दल सेक्युलर (जेडीएस) और कांग्रेस के विधायक रुके हुए हैं. इसी को लेकर विधायकों की पहले गोवा शिफ्ट होने की बात सामने आई थी लेकिन मंगलवार सुबह यह बात साफ हो गयी कि वह मुंबई में ही हैं.
स्पीकर के फैसले पर सबकी नजर
बेंगलुरु में कांग्रेस, जेडीएस और बीजेपी की लगातार बैठकें हो रही हैं. एक तरफ जहां बीजेपी अपनी सरकार बनाने की कोशिश में हैं वहीं दूसरी ओर कांग्रेस-जेडीएस भी हार मानने को तैयार नहीं हैं.
हांलाकि इन सब के बीच सभी की नजर विधानसभा स्पीकर पर है. जिनके हाथों में विधायकों के इस्तीफे का फैसला है. उल्लेखनीय है कि स्पीकर मंगलवार को विधायकों के इस्तीफे का फैलसा लेंगे.
सरकार गिराने की कोशिश के पीछे भाजपा का हाथ
कांग्रेस ने भाजपा पर कर्नाटक में जेडीएस के साथ पार्टी की सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार को सत्ता से हटाने के लिए षड्यंत्र रचने का आरोप लगाया है. पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरमैया, पूर्व केंद्रीय मंत्री मल्लिकार्जुन खड़गे और कर्नाटक के जल संसाधन मंत्री डी के शिवकुमार ने अपना यह आरोप दोहराया कि इस दक्षिणी राज्य में वर्तमान राजनीतिक कारगुजारी के पीछे भाजपा है. हालांकि भाजपा ने कहा कि उसका इससे कोई लेना देना नहीं है.
कांग्रेस प्रवक्ता राधाकृष्णन ने यह स्पष्ट रूप से कहा, सरकार गिराने की कोशिश के पीछे भाजपा का हाथ है. वे लोगों को मूर्ख नहीं बना सकते. कहा कि भाजपा के केंद्रीय नेता इसमें शामिल हैं. उनकी भूमिका पूरी तरह से स्पष्ट है.
राधाकृष्णन ने दावा किया कि असंतुष्ट विधायकों के शनिवार को राज्यपाल वजुभाई वाला से मुलाकात करके राजभवन से बाहर आने के बाद उन्हें ले जाने के लिए चार्टर्ड विमान को एचएएल हवाई अड्डे पर तैयार रखा गया था.
आरोप लगाया कि सरकार गिराने का षड्यंत्र एक सप्ताह पहले रचा गया, जब जेडीएस विधायक ए एच विश्वनाथ दिल्ली गये थे और वहां भाजपा नेताओं से मिले थे.




