
Mumbai: कर्नाटक की सियासत में संकट का नाटक जारी है. एक ओर जहां जेडीएस और कांग्रेस बागी विधायकों को मनाने की कोशिश में है. वहीं बागी विधायक पल-पल अपना ठिकाना बदल रहे हैं.
पहले खबर आयी थी कि बागी विधायकों को विशेष विमान से पहले पुणे फिर वहां से गोवा ले जाने की तैयारी है. लेकिन अब खबर है कि सभी विधायक मुंबई में ही कहीं हैं.
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और पल-पल ठिकाना बदल रहे हैं. वहीं मंगलवार को स्पीकर इनके इस्तीफे पर फैसला लेंगे. इन विधायकों में कांग्रेस के दस, जेडीएस के दो और दो निर्दलीय विधायक शामिल हैं.
मंत्री पद का ऑफर ठुकराया
बागी विधायकों को मनाने के लिए कुमारस्वामी सरकार ने उन्हें मंत्री पद ऑफर किया था. इसके लिए कांग्रेस कोटे के सभी मंत्रियों ने इस्तीफा भी प्रदेश अध्यक्ष को सौंप रखा है.
लेकिन खबर है कि मंत्री पद का लालच भी इन्हें मनाने में कामयाब नहीं हो सका. बागी विधायकों ने कहा कि मौजूदा सरकार में मंत्री बनने का कोई मतलब नहीं होगा क्योंकि कांग्रेस सरकार की स्थिरता को आसानी से हिलाया जा सकता है.
विधायकों ने कहा, ‘उन्होंने पेश किए गए समझौते को खारिज कर दिया है और अपने इस्तीफे को लेकर काफी दृढ़ हैं.’ उन्होंने कहा कि वे बीजेपी की अगुआई वाली नई सरकार का हिस्सा बनना चाहते हैं.
येदियुरप्पा ने मांगा कुमारस्वामी का इस्तीफा
संख्या बल के हिसाब से देखें तो कुमारस्वामी की सरकार, अल्पमत में नजर आती है. हालांकि स्पीकर ने अभी तक इनका इस्तीफा मंजूर नहीं किया है.
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पहले 13 विधायकों के इस्तीफे के बाद, सोमवार को दो निर्दलीय एमएलए ने भी कुमारस्वामी सरकार से समर्थन वापस ले लिया है.
इस सियासी संकट के बीच पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) नेता बीएस येदियुरप्पा ने सीएम कुमारस्वामी से इस्तीफा मांगा है.
बंगलुरु में बीजेपी के विधायक दल की बैठक हुई. बैठक से पहले पूर्व मुख्यमंत्री येदियुरप्पा ने कहा कि ‘सरकार अल्पमत में है. मुख्यमंत्री को तत्काल प्रभाव से इस्तीफा देना चाहिए.’
साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ‘मंगलवार को इस मांग को लेकर पूरे राज्य में प्रदर्शन किया जायेगा. हालांकि सरकार बनानी है या नहीं बनानी, इस बात का फैसला केंद्रीय नेतृत्व द्वारा किये जाने की बात उन्होंने की.
क्या कहते हैं आंकड़ें
गौरतलब है कि कर्नाटक की सालभर पुरानी कांग्रेस-जदएस गठबंधन सरकार इन विधायकों के इस्तीफे की वजह से गिरने की कगार पर पहुंच गयी है. कर्नाटक विधानसभा में एक नामित विधायक समेत 225 सदस्य हैं. सदन में इसकी आधी सदस्य संख्या 113 होती है.
इन इस्तीफों से पहले विधानसभा में कांग्रेस के 78, जदएस के 37 और भाजपा के 105 विधायक थे. कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन को विधानसभा में 119 विधायकों का समर्थन प्राप्त था. अगर बागी विधायकों का इस्तीफा मंजूर होता है तो कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन के पास 104 रह जायेगी.
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