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JMM के नेतृत्‍व में विपक्ष द्वारा आहूत 5 जुलाई का झारखंड बंद गैरकानूनी: बीजेपी

हाईकोर्ट की रोक के बाद किस आधार पर बुलाया गया बंद- प्रतुल

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Ranchi: झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेतृत्‍व में विपक्षी दलों द्वारा 5 जुलाई को बुलाया गया झारखंड बंद पूरी तरह से असंवैधानिक और गैरकानूनी है. यह बात बीजेपी के प्रदेश प्रवक्‍ता प्रतुल नाथ शाहदेव ने कही है. पार्टी प्रवक्‍ता ने कहा है कि यह पूरा मामला संविधान और हाइकोर्ट के अवमानना का मामला बनता है. बता दें कि भूमि अधिग्रहण संशोधन विधेयक के विरोध में विपक्ष ने 5 जुलाई को 24 घंटे का झारखंड बंद बुलाया है.

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प्रतुल शाहदेव ने कहा कि 3 दिसंबर 2003 को झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस बाला सुब्रमण्यम और तपन सेन की बेंच ने एक पीआईएल की सुनवाई करते हुए निर्णय सुनाया था कि बंद बुलाने और बंद जैसे किसी आंदोलन करने को लेकर प्रतिबंधित किया गया था. यह प्रतिबंध 21 अगस्‍त 2003 को जेएमएम द्वारा बुलाये एक बंद के दौरान हुई हिंसा के बाद लगाया गया था. उस बंद के दौरान व्‍यापक पैमाने पर हिंसा हुई थी. वकीलों को पीटा गया था, उन्‍हें हाईकोर्ट जाने से रोका गया था. हाईकोर्ट के आदेश के पैरा 9 में यह स्‍पष्‍ट रूप से कहा गया है कि जेएमएम को ऐसे असंवैधानिक कार्य और ऐसे तोड़फोड़ के कार्य करने से प्रतिबंधित करते हैं और उस पर रोक लगाते हैं. उन्‍होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा, हाई कोर्ट के निर्देशों और संविधान की भी अवहेलना कर रही है.

प्रेस वार्ता के दौरान बीजेपी प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने जेएमएम से पूछा है कि हाईकोर्ट ने किसी तरह का बंद बुलाने पर रोक लगाई है फिर जेएमएम ने किस हैसियत से 5 जुलाई का बंद बुलाया है. इससे साबित होता है कि जेएमएम का संविधान, हाईकोर्ट और लोकतांत्रिक सरकार में आस्‍था नहीं है. उन्‍होंने ये भी पूछा कि क्‍या जेएमएम ने हाईकोर्ट के इस आदेश पर क्‍या कोई स्‍टे लिया गया है.

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वहीं भूमि अधिग्रहण बिल पर प्रतुल शाहदेव ने कहा है कि विपक्ष का हल्‍ला करना और सरकार के निर्णय पर यह कहना कि बैकफुट पर आकर ये फैसला लिया गया, यह गलत है. जो संशोधन हुए वह कांग्रेस के तत्कालीन अध्‍यक्ष सुखदेव भगत के सुझाव पर हुए, और अब विपक्ष जो कह रहे हैं वह उनके राजनीति के दोहरे चरित्र प्रदर्शित करता है.

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