
NewDelhi : मध्याह्न भोजन योजना के कार्यान्वयन और स्वच्छता को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड पर 50 हजार का जुर्माना लगाया है. झारखंड के अलावा तमिलनाडु और उत्तराखंड पर भी 50-50 हजार का जुर्माना लगा है. बता दें कि सरकारी स्कूलों में मध्याह्न भोजन योजना के कार्यान्वयन और स्वच्छता की निगरानी के लिए एक चार्ट के साथ ऑनलाइन लिंक देने में विफलता रहने के कारण जुर्माना लगाया गया है. मध्याह्न भोजन के संबंध में एनजीओ अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकार निगरानी परिषद की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा था.
कोर्ट ने पिछले साल 23 मार्च को राज्य सरकारों और केंद्रशासित प्रदेशों से मध्याह्न भोजन योजना का लाभ पा रहे कुल छात्रों की संख्या समेत अन्य सूचनाएं तीन महीने के भीतर अपनी वेबसाइटों पर डालने को कहा था.
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पीठ ने नाराजगी जताई कि इन राज्यों ने कोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं किया है
न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने इस बात पर नाराजगी जताई कि इन तीन राज्यों ने अब तक इस संबंध में कोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं किया है. पीठ ने कहा, इन तीन राज्यों की चूक के मद्देनजर इन राज्यों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाता है. चार सप्ताह के अंदर उच्चतम न्यायालय विधिक सेवा प्राधिकरण में जमा करने का आदेश दिया गया है.
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पीठ ने इस मामले की सुनवाई की अगली तारीख 20 सितंबर तय की
यह इस राशि किशोर न्याय से जुड़े मुद्दों में इस्तेमाल की जायेगी. याचिकाकर्ता के वकील ने पीठ से कहा कि कुछ राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने वेबसाइट पर अलग लिंक नहीं दिया है, जबकि ऐसा न्यायालय के निर्देश की शर्तों के अनुसार करना था और उन्होंने कोई चार्ट नहीं भरा है. इस पर पीठ ने कहा कि ऐसा नहीं करने वालो राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में अरूणाचल प्रदेश, दादरा एवं नागर हवेली और पुडुचेरी शामिल हैं.
फिलहाल हम इन राज्यों पर जुर्माना नहीं लगा रहे हैं. हम उम्मीद करते हैं कि ये राज्य समय-समय पर इस अदालत द्वारा दिये गए निर्देशों का पालन करेंगे. पीठ ने इस मामले की सुनवाई की अगली तारीख 20 सितंबर तय की है.
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