इंफाल: मणिपुर में विधानसभा चुनाव लड़ने जा रही ‘आयरन लेडी’ के नाम से मशहूर इरोम शर्मिला ने अपना चुनाव प्रचार शुरू कर दिया है। अपने गृह क्षेत्र खुरई में रविवार को एक जनसमूह को संबोधित करते हुए इरोम शर्मिला ने कहा कि वह बिना पैसे की ताकत के चुनाव लड़ेंगी। वह कांग्रेस के विधायक एन. बिजॉय के खिलाफ चुनाव लड़ेंगी।
इरोम, मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह के खिलाफ थौबल विधानसभा सीट से भी चुनाव लड़ेंगी।
नागरिक अधिकार तथा राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि अगर वह विधानसभा चुनाव हार जाती हैं, तो साल 2019 में लोकसभा चुनाव लड़ेंगी।
इरोम शर्मिला मणिपुर से सशस्त्र बल (विशेष शक्ति) अधिनियम 1958 (अफस्पा) को हटाने को लेकर बीते 16 वर्षो से आमरण अनशन पर थीं। उन्होंने अपनी मां सहित कई लोगों के कड़े विरोध के बावजूद नौ अगस्त को अपना अनशन खत्म कर दिया।
इरोम ने लोगों को इस बात से आश्वस्त किया है कि उन्होंने कठोर कानून अफस्पा के खिलाफ अपना अभियान खत्म नहीं किया है। उन्होंने इससे पहले इच्छा जताई थी कि अगर वह प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं तो इस कठोर कानून को राज्य से हटा देंगी।
उन्होंने कहा, “मेरे अनशन को लोगों का बहुतायत में समर्थन नहीं मिला, इसलिए मैंने विधानसभा में पहुंचकर इस कानून को हटाने के लिए लड़ने का फैसला किया।”
इरोम ने अक्टूबर में एक नई पार्टी का गठन किया है, जिसका नाम पीपुल रिसर्जेस एंड जस्टिस अलायंस है। हालांकि, आज की तारीख तक इस पार्टी की वही एकमात्र सदस्य हैं।
राजनीतिज्ञों को लगता है कि इरोम का राजनीति में सफल होना मुश्किल है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता निमाईचंद लुवांग ने कहा, “मानवाधिकार व राजनीति दो अलग-अलग क्षेत्र हैं।”
इसके अलावा, पार्टियों से जुड़े नेताओं का मानना है कि जिस उम्मीदवार के पास पैसे नहीं हैं, उसके लिए राजनीति में दिक्कत ही दिक्कत है।




