
Palamu : चुनाव के वक्त में जनता अगर खामोश रही तो भ्रष्ट नेता और मंत्री चुनकर आएंगे. ऐसे वक्त में हमें पूछने होंगे सवाल, मांगने होंगे जवाब, करनी होगी दुश्मनों की पहचान और करने होंगे फैसले. सफदर हाशमी के इस संवाद को जनता के बीच नुक्कड़ पर इप्टा के कलाकारों ने सुनाया. शहीद रंगकर्मी सफदर हाशमी की याद में इप्टा की पलामू इकाई द्वारा चल रहे कार्यक्रमों के अंतर्गत शुक्रवार को कचहरी परिसर में नुक्कड़ नाटक और जनगीत मंचन किए.
सफदर के नाटकों को दी गयी जीवंत रूप
सफदर के कई नाटकों के महत्वपूर्ण और समसामयिक संवाद को संकलित कर कलाकारों ने जीवंत रूप में मंचन किया. नाटक में जब बेरोजगार नौजवान के सारे सपने टूट चुके हैं, तब वह पूछ रहा है कौन है इसका जिम्मेवार, तो दूसरी तरफ मुल्क में धर्म और जाति के नाम पर बोये जा रहे नफरत के बीज को पाटने के लिए भी सफदर के नाटक का संवाद याद किया गया. मौत फिर मौत है आगाज से अंजाम तलाक, मौत न हिंदू होती है न मुसलमां. ऐसे ही जीवंत और ज्वलंत संवादों के साथ नाटक के अंत में सभी कलाकार जनता की एकजुटता का आह्वान करते हुए उन्हें याद दिलाते हैं कि ऐसे वक्त में अपनी आंखें खुली रखो, अपने दिमाग रौशन करो, सोंचो और फैसला करो, जनता का असली दुश्मन कौन है.
कलाकारों में कौन-कौन
नाटक की परिकल्पना और निर्देशन प्रेम प्रकाश की थी. कलाकारों में प्रीतम कुमार, मनीष कुमार, आयूष प्रकाश, अजीत ठाकुर, शशि पाण्डेय, दिनेश, रवि शंकर व प्रेम प्रकाश शामिल थे. इस दौरान कलाकारों ने सफदर के गीत पढ़ना लिखना सीखो वो मेहनत करने वालों, पढ़ना लिखना सीखो वो भूख से लड़ने वालों भी गाया. ये वक्त की आवाज है मिल के चलो गीत के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ.
कौन-कौन थे उपस्थित
मौके पर इप्टा के राज्य महासचिव उपेंद्र मिश्रा, भाकपा नेता केडी सिंह, बेतला महोत्सव के संयोजक राजेश पांडेय, अभय मिश्रा, प्रांजल अनुभव समेत काफी संख्या में दर्शक मौजूद थे.
6 जनवरी को होगा मुशायरा
इप्टा के सचिव रवि शंकर ने बताया कि सफदर हाशमी शहादत सप्ताह का समापन 6 जनवरी रविवार को भगत सिंह चौक पर किया जाएगा. इस दिन सफदर की याद में कवि सम्मेलन मुशायरा का आयोजन किया गया है. साथ ही इप्टा के कलाकार नाटक व जनगीत भी प्रस्तुत करेंगे.




