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Ranchi, 14 August: भू-अर्जन विधेयक राज्य में 2017 से नहीं बल्कि 2014 से ही लागू करने की सरकार की योजना है. इस विधेयक को कैबिनेट ने 5 अगस्त को जहां अपनी सहमति दी थी. वहीं 12 अगस्त को झारखंड विधानसभा में इसे पारित भी कर दिया गया था. विधानसभा में पारित होने के बाद इसे अब राज्यपाल के पास भेजा गया है. उनकी मंजूरी के बाद ये विधेयक कानून का रूप ले लेगा.
विधेयक का विरोध करने की रणनीति बना चुका है विपक्ष
सीएनटी-एसपीटी एक्ट में संशोधन विधेयक के नामंजूर होने का बाद विपक्ष इस विधेयक का भी पुरजोर तरीके से विरोध करने की तैयारी में है. झामुमो ने सरकार की इस योजना के बारे में राज्यपाल को अवगत करा दिया है. कानूनी जानकारों का मानना है कि विधेयक को बैकडेट से प्रभावी करना आसान नहीं होगा. इसमें कई तरह की परेशानी आ सकती है.
परेशानी हुई तो सरकार जवाब देगी
विपक्ष के विरोध पर सरकार के मंत्री सरयू राय का कहना है कि विधि विभाग से राय मशविरा कर के ही किसी विधेयक को बनाया जाता है. अगर कोई परेशानी हुई तो उसके कई रास्ते हैं. किसी भी सवाल का जवाब देने के लिए सरकार हर वक्त तैयार है.
क्या है विधेयक में
संशोधन के मसौदे पर अगर गौर करें तो विद्यालय, महाविद्यालय, विश्वविद्यालय, अस्पताल, पंचायत भवन, आंगनबाड़ी, रेल, सड़क, जलमार्ग, सिंचाई, जलापूर्ति आदि योजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहीत की जाएगी. यह सभी काम ग्रामसभा के माध्यम से होगा.




