
NewDelhi : दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में 90 करोड़ वोटर हैं. अनुमान के अनुसार इनमें से लगभग 50 करोड़ की पहुंच इंटरनेट तक है. साथ ही भारत में फेसबुक के 30 करोड़ यूजर हैं और फेसबुक के मालिकाना हक वाली वॉट्सऐप मेसेजिंग सर्विस के लगभग 20 करोड़ यूजर हैं. यानी सोशल मीडिया पर वोटरों की यह मौजूदगी दुनिया के किसी भी लोकतंत्र से ज्यादा है. इसके अतिरिक्त भारत में ट्विटर इस्तेमाल करने वाले भी करोड़ों में हैं. इसका मतलब भारत में 2019 के चुनाव में ऑन लाइन यानी सोशल मीडिया की जंग होगी. जानकारों के अनुसार यह दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक कवायद होगी. यह चुनाव सोशल मीडिया की भूमिका का अबतक का सबसे बड़ा इम्तिहान होगा. बता दें कि सत्ताधारी भाजपा इस ऑनलाइन बैटल के लिए तैयार है. वहीं, हालिया विधानसभा चुनावों में शानदार सफलता से उत्साहित कांग्रेस पूरी तरह तैयार है. विपक्ष उसकी कदमताल मिलायेगा. 2019 यानी अगले साल अप्रैल-मई में आम चुनाव होने की संभावना जताई गयी है. चुनाव में फेसबुक, ट्विटर और वॉट्सऐप की भूमिका अहम रहने वाली है.
2019 के चुनाव में सोशल मीडिया और डेटा ऐनालिटिक्स का रोल अहम रहेगा
भारतीय राजनीति और सोशल मीडिया का गहराई से अध्ययन करने वाली ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न स्थित डिएकिन यूनिवर्सिटी में कम्यूनिकेशंस की प्रोफेसर उषा एम रोड्रिग्स की रिसर्च इसी पर आधारित हैं. रोड्रिग्स के अनुसार भारत के आगामी चुनाव में सोशल मीडिया और डेटा ऐनालिटिक्स का किरदार काफी अहम रहेगा. इनका ऐसा इस्तेमाल होगा, जो पहले कभी नहीं हुआ है क्योंकि भाजपा और कांग्रेस अब सोशल मीडिया का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करती हैं. यह भी कहा कि चुनाव में सोशल मीडिया के दुरुपयोग की भी काफी आशंका है. धार्मिक विविधता वाले देश में भड़काऊ खबरें और वीडियो हिंसा भड़काने में सक्षम हैं. डेटा पोर्टल इंडिया स्पेंड के अनुसर सोशल मीडिया पर फैलाई गयी अफवाहों ने इस साल 30 से ज्यादा जानें ली हैं. इसी क्रम में वॉशिंगटन स्थित कार्निज एन्डाउमन्ट फॉर इंटरनैशनल पीस में सीनियर रिसर्च फेलो मिलन वैष्णव कहते हैं, सोशल मीडिया पर माहौल पहले ही बहुत खराब हो चुका है. उनका मानना है कि चुनाव आते-आते यह और भी जहरीला हो जायेगा.
दोनों प्रमुख पार्टियां एक दूसरे पर फेक न्यूज फैलाने का आरोप लगा रही हैं और खुद को पाक-साफ बता रही हैं. दोनों दल चुनावी समर के लिए अपने-अपने हथियारों को धार देना शुरू कर चुके हैं. कांग्रेस जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर उनकी आर्थिक नीतियों और उनकी पार्टी की हिंदू राष्ट्रवादी विचारधारा को लेकर हमला कर रही है, वहीं भाजपा कांग्रेस को जनता से कटी हुई बताकर उस पर हमला कर रही है.
बता दें कि कांग्रेस ने हिंदी पट्टी के तीन बड़े राज्यों में भाजपा को मात दी है. सत्ता का सेमीफाइनल कहे गये इन चुनावों ने 2019 में कड़ी टक्कर का मंच तैयार कर दिया है. जानकारों के अनुसार हालिया विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की जीत के पीछे उसकी बदली हुई सोशल मीडिया रणनीति का भी बड़ा हाथ है.
दोनों दलों ने वॉर रूम तैयार कर लिये हैं
2014 पर नजर डालें तो इस आम चुनाव में टेक्नो-सेवी मोदी के हाथों कांग्रेस को अपने इतिहास की सबसे बड़े पराजय का सामना करना पड़ा था. मोदी की इस करिश्माई जीत में सोशल मीडिया एक बड़ा हथियार था. ट्विटर पर जहां वह आक्रामक रहे, वहीं भजपा ने फेसबुक पर भी प्रभावी अभियान चलाया था. अपनी रैलियों में भी भाजपा ने आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया. कांग्रेस नेता राहुल गांधी तो उस समय ट्विटर भी नहीं थे. उनका ट्विटर अकाउंट 2015 में बना; लेकिन अब, विपक्ष भी तैयार है और उसके भी तरकश में सोशल मीडिया के हथियार हैं; दोनों दलों ने सोशल मीडिया पर आक्रामक अभियान के लिए वॉर रूम तैयार कर लिये हैं. काउंटरपॉइंट रिसर्च के अनुसार 2014 में भारत में 15.5 करोड़ लोगों के पास स्मार्टफोन था, जबकि वर्तमान में 45 करोड़ लोगों के पास स्मार्टफोन हैं. यह अमेरिका की पूरी आबादी से भी ज्यादा है.




