
Ranchi : बाबूलाल मरांडी ने मंगलवार को हुये कैबिनेट बैठक में सरकार द्वारा लिये गये निर्णय पर नाराजगी जतायी है. उन्होंने बुधवार को प्रेसवार्ता आयोजित कर कहा कि गैर अनुसूचित 11 जिलों के लिए स्थानीय व नियोजन नीति को दी गई मंजूरी के निर्णय से हम सहमत नहीं हैं. यह झारखंडी नौजवानों के साथ छलावा है. पहले तो राज्य की भाजपा सरकार ने झारखंड को ही 13 व 11 जिलों में बांटकर दो फाड़ करने का प्रयास किया. 2019 चुनाव की दस्तक और अपने ही दर्जनों विधायकों के बगावती तेवर के कारण मंत्री अमर बाउरी की अध्यक्षता में सरकार को आनन-फानन में कमेटी का गठन करना पड़ा.
Ranchi : बाबूलाल मरांडी ने मंगलवार को हुये कैबिनेट बैठक में सरकार द्वारा लिये गये निर्णय पर नाराजगी जतायी है. उन्होंने बुधवार को प्रेसवार्ता आयोजित कर कहा कि गैर अनुसूचित 11 जिलों के लिए स्थानीय व नियोजन नीति को दी गई मंजूरी के निर्णय से हम सहमत नहीं हैं. यह झारखंडी नौजवानों के साथ छलावा है. पहले तो राज्य की भाजपा सरकार ने झारखंड को ही 13 व 11 जिलों में बांटकर दो फाड़ करने का प्रयास किया. 2019 चुनाव की दस्तक और अपने ही दर्जनों विधायकों के बगावती तेवर के कारण मंत्री अमर बाउरी की अध्यक्षता में सरकार को आनन-फानन में कमेटी का गठन करना पड़ा. कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर मंगलवार को कैबिनेट द्वारा गैर अनुसूचित 11 जिलों के लिए स्थानीय व नियोजन नीति को कैबिनेट द्वारा मंजूरी दी गई है.
कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कुल पांच अनुशंसा की है, परंतु ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार ने उसमें से केवल एक अनुशंसा को थोड़ा-बहुत छूकर मानो कमेटी का केवल मान रख रही हो. सरकार के इस निर्णय से गैर झारखंडियों को राज्य में नौकरियों में भागीदारी से नहीं रोका जा सकता है. कल कोई व्यक्ति अदालत चला जाएगा तो 2001 की भांति सरकार का यह निर्णय भी टिक नहीं पाएगा. हम संविधान से इतर कुछ नहीं चाहते और सरकार का भी दायित्व होता है कि वह कोई भी निर्णय कानून-सम्मत ही ले.
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कानून बनाकर झारखंड की सभी नौकरियों को 20 वर्षों के लिए आरक्षित करे सरकार
उन्होंने कहा कि थर्ड व फोर्थ ग्रेड ही क्यों, झारखंड सरकार के अधीन जितनी भी नौकरियां है, तमाम नौकरियों को संविधान की अनुच्छेद-16 के खंड –3 के तहत शिड्यूल-9 में डालते हुए कानून बनाकर 20 वर्षों तक झारखंडियों के लिए आरक्षित की जाय, ताकि कल कोई उसे चुनौती नहीं दे पाए. साथ ही जितनी भी वैकेंसी है, उसे तत्काल स्थगित करे. जब कानून बन जाए, तब बहालियां कराई जाये. जहां तक स्थायी निवासी के परिभाषित का सवाल है तो कमेटी ने जो रिपोर्ट सरकार को सौंपी है, सरकार उसे ही समझ ले या उसका अनुपालन कर ले तो हमें नहीं लगता कि फिर हमें कुछ कहने की जरूरत होगी.
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