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भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल के विरोध में झारखंड बंद बेअसर !

Ranchi :  झारखंड भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल को राष्ट्रपति द्वारा दी गयी मंजूरी के खिलाफ आदिवासी सेंगल अभियान और झारखंड दिशोम पार्टी ने संयुक्त रूप से सोमवार को झारखंड बंद का ऐलान किया है. हालांकि इस बंद का राजधानी रांची में कोई असर नहीं दिख रहा. लेकिन रांची से सटे दूसरे जिलों में बंद का आंशिक असर देखने को मिल रहा है.

Ranchi :  झारखंड भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल को राष्ट्रपति द्वारा दी गयी मंजूरी के खिलाफ आदिवासी सेंगल अभियान और झारखंड दिशोम पार्टी ने संयुक्त रूप से सोमवार को झारखंड बंद का ऐलान किया है. हालांकि इस बंद का राजधानी रांची में कोई असर नहीं दिख रहा. बंद का राजधानी में कोई असर नहीं है. स्कूल-कॉलेज सामान्य रुप से खुले हैं. सड़कों पर गाड़ियों की आवाजाही भी जारी है. इधर बंद को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये हैं.  लेकिन रांची से सटे दूसरे जिलों में बंद का आंशिक असर देखने को मिल रहा है. गुमला में बंद का असर देखने को मिल रहा है. यहां से लम्बी दूरी की गाड़ियां  नहीं चली.  

इसे भी पढ़ेंः भूमि अधिग्रहण के विरोध में 18 जून को आदिवासी संगठनों ने बुलाया झारखंड बंद, जेएमएम से समर्थन मांगा 

इधर सोमवार को बुलाये गये इस बंद से आदिवासी संघर्ष मोर्चा ने खुद को अलग रखा है. वही बंद का आह्वान करने वाले संगठनों के मुताबिक संशोधित बिल को मंजूरी मिलना एक तरह से राज्य के आदिवासी/मूलवासी समाज के लिए डेथ वारंट से ज्यादा कुछ नहीं है.

आदिवासी मूलवासी समाज के लिए है डेथ वारंट :  आदिवासी संगठन

विकास के नाम पर राज्य सरकार द्वारा तांडव नृत्य करने की बात करते हुए इन आदिवासी संगठनों का कहना है कि झारखंड भूमि अधिग्रहण कानून 2017 पर राष्ट्रपति की मुहर आदिवासी-मूलवासी समाज के लिए एक तरह से डेथ वारंट है. सरकार विकास के नाम पर इस बिल के द्वारा गरीबों पर तांडव नृत्य करेगी. इसे देखते हुए ही आदिवासी समाज द्वारा इस संशोधित बिल का विरोध किया जाना जरूरी है. 

विभिन्न पार्टियों ने भी किया हैं संशोधित बिल का विरोध

मालूम हो कि शुक्रवार को राष्ट्रपति ने झारखंड भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल 2017 को मंजूरी प्रदान कर दी है. इसके बाद जेवीएम, आजसू सहित कई पार्टियों ने भी पुरजोर इस संशोधित बिल का विरोध किया है. विधेयक पर राष्ट्रपति की मुहर लग जाने के बाद अब राज्य की विकास योजनाओं के लिए किये जाने वाले जमीन अधिग्रहण के लिए सोशल इम्पैक्ट असेस्मेंट की बाध्यता पूरी तरह से समाप्त हो जायेगी. साथ ही सरकार की  अस्तित्‍़व  महत्वपूर्ण परियोजनाओं जैसे कि विद्यालय, महाविद्यालय, सिंचाई, पाइप लाइन, सड़क, गरीबों के आवास के लिए जमीन आदि के लिए जमीन का अधिग्रहण किया जाना संभव हो सकेगा.

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