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अपमानजनक टिप्पणी मामला : विधायक शर्मा और लांबा के बीच नहीं सुलझ पाया विवाद

नई दिल्ली : दिल्ली उच्च न्यायालय ने गुरुवार को कहा कि आम आदमी पार्टी (आप) विधायक अलका लांबा के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां करने के आरोपी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायक ओ.पी. शर्मा के मामले की सुनवाई शुक्रवार को होगी। दिल्ली विधानसभा से दो सत्रों के लिए निलंबित किए गए शर्मा और आप नेता लांबा के बीच विवाद पर गुरुवार को अदालत में समझौता नहीं हो पाया।

दोनों नेताओं के बीच लगभग दो घंटे की मध्यस्थता के बाद न्यायमूर्ति मनमोहन सिंह ने कहा कि समझौता होना संभव नहीं लग रहा है और कहा कि मामले की सुनवाई शुक्रवार को होगी।

भाजपा नेता ने उन्हें दो सत्रों के लिए निलंबित करने के दिल्ली विधानसभा के प्रस्ताव के खिलाफ अदालत में गुहार लगाई है।

दोनों नेताओं के बीच समझौता न हो पाने के कारण शर्मा गुरुवार को दिल्ली विधानसभा के विशेष सत्र में शामिल नहीं हो पाए।

अदालत ने बुधवार को शर्मा और लांबा से कहा था कि वे ‘खुले दिमाग से’ गुरुवार को अदालत में आएं ताकि वह मामला सुलझाने के लिए उनसे बात कर सके।

न्यायमूर्ति मनमोहन सिंह ने अपने कक्ष में लगभग दो घंटे तक उनसे अलग-अलग बात की, लेकिन शर्मा ने एकतरफा माफी मांगने से इनकार कर दिया और अदालत से निलंबन के खिलाफ अपनी याचिका पर विचार करने को कहा।

शर्मा के वकील ने कहा, “हम उचित निपटारा चाहते थे, लेकिन लांबा माफी पर अड़ी हैं।”

आचार समिति ने शीतकालीन सत्र में लांबा के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां करने को लेकर शर्मा के निष्कासन की सिफारिश की थी। इसके बाद दिल्ली विधानसभा ने 31 मार्च को शर्मा के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित किया था।

वरिष्ठ अधिवक्ता सुधीर नंदराजोग ने बुधवार को कहा कि शर्मा को खेद व्यक्त करने के कई मौके दिए गए, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया।

शर्मा ने अपनी याचिका में कहा कि आचार समिति का फैसला ‘गलत और पक्षपातपूर्ण’ है क्योंकि उसके सभी नौ सदस्य आप के थे।

याचिका के मुताबिक, “कार्यवाही पक्षपातपूर्ण थी और न्याय के सिद्धांत के विपरीत दुर्भावनापूर्ण तरीके से की गई थी।”

याचिका में कहा गया है कि आचार समिति ने शर्मा के स्पष्टीकरण पर न ही विचार किया और न ही इसका मूल्यांकन किया।

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