
Ranchi : सरकारी विद्यालयों के छात्र-छात्राओं को डॉक्टर और इंजीनियर बनाने के उद्देश्य से आकांक्षा-40 की स्थापना की गई. इसकी शुरुआत स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की सचिव आराधना पटनायक ने की थी. मेधावी छात्रों ने अपने भविष्य को संवारने के उद्देश्य से पहले प्रवेश परीक्षा दी, जिसमें पास होने के बाद यहां नामांकन करवाया. लेकिन अकांक्षा-40 के छात्रावास में रह रही छात्राओं को पानी के लिए भटकना पड़ रहा है. गौरतलब है कि बरियातु स्थित आकांक्षा-40 छात्रावास में रहने वाली 29 छात्राओं को सुविधा के नाम पर केवल छत मिली है.
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न पीने का पानी, न बेहतर भोजन
अकांक्षा-40 छात्रावास में रहने वाली छात्रा अनुपमा शिखा ने कहा कि हॉस्टल में पिछले दस दिनों से पानी की भारी किल्लत है. पीने का पानी भी खरीद कर लाना पड़ रहा है. वहीं मेस में जो खाना दिया जाता है उसकी गुणवत्ता ठीक नहीं है. परीक्षा की तैयारी के लिए एनसीईआरटी की किताब के अलावे अन्य किताब उपलब्ध नहीं हो पाता है. ऐसे में पढ़ाई करना और भी कठिन हो गया है. छात्रा ने कहा कि इन सभी समस्याओं को लेकर एक दिन भूख हड़ताल भी की, लेकिन प्रबंधन के द्वारा सिर्फ आश्वासन दिया गया. व्यवस्था आज भी वैसी ही है. इन्हीं परेशानियों के कारण सही ढंग से पढ़ाई नहीं कर पाती हूं.
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लड़कों के हॉस्टल से लाना पड़ता है पानी
इसी छात्रावास में रहने वाली छात्रा सुनिधि प्रकाश ने कहा कि पीने के पानी के लिए बॉयज हॉस्टल जाना पड़ता है. वहीं छात्रावास का अपना गार्ड भी नहीं है. न ही छात्रावास में वार्डेन रहता है. रात में किसी छात्रा की तबीयत खराब हो जाती है तो फोन करने पर भी कोई मदद के लिए नहीं आता है. यदि कंप्लेन करने जाते हैं तो सर कहते है कि टीसी लेकर घर चली जाओ. छात्रा ने कहा कि अखिर हम अपनी परेशानी किसे सुनाएं ?
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