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भ्रष्टाचार के मामले में खालिदा जिया को पांच साल की कैद, जिया के बेटे और चार अन्य को 10-10 साल की सजा

Dhaka: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया को आज भ्रष्टाचार के एक मामले में पांच साल कैद की सजा सुनायी गयी. यह पूर्व प्रधानमंत्री और बीएनपी प्रमुख के लिए एक बड़ा झटका है क्योंकि उन्हें दिसंबर में होने वाला अगला आम चुनाव लड़ने से रोका जा सकता है.

खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान और चार अन्य को 10-10 साल कैद की सजा

ढाका की विशेष अदालत ने 72 वर्षीय जिया को 2.1 करोड़ टका (252,000 डालर) के विदेशी चंदे के गबन के सिलसिले में यह सजा सुनायी. यह राशि जिया ओरफनेज ट्रस्ट के वास्ते थी. इसी मामले में उनके बेटे तारिक रहमान और चार अन्य को 10-10 साल कैद की सजा सुनायी गयी है.

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चार साल बाद आया मामले में फैसला

न्यायाधीश मोहम्मद अख्तरजुम्मा ने जिया को सश्रम कारावास की सजा सुनायी और कहा कि कम अवधि की कैद की सजा उनके स्वास्थ्य और सामाजिक दर्जे को ध्यान में रखकर सुनायी गयी है. उन्होंने 632 पन्नों के अपने फैसले का संक्षिप्त संस्करण पढ़कर सुनाया. उस वक्त अदालत में बीएनपी के कई नेता मौजूद थे. यह फैसला जिया और अन्य को इस मामले में अभ्यारोपित किये जाने के चार साल बाद आया है.

दिसंबर में होने वाला चुनाव से वंचित हो सकती हैं जिया

कानूनी विशेषज्ञों की राय है कि इस फैसले के बाद ऐसी आशंका है कि जिया को दिसंबर में होने वाला चुनाव नहीं लड़ने दिया जाएगा. इस फैसले के आने से पहले देश में सरकारी और गैर सरकारी प्रतिष्ठानों की सुरक्षा कड़ी कर दी गयी थी. लेकिन जब जिया अदालत जा रही थीं तब उनके समर्थकों की पुलिस के साथ झड़प हुई. भ्रष्टाचार के मामले में सुनवाई से बचने की जिया की अंतिम कोशिश भी 30 नवंबर, 2014 को तब नाकाम हो गई थी जब सुप्रीम कोर्ट ने उनके अभ्यारोपण को चुनौती देने वाली उनकी अपील को स्वीकार नहीं किया था और उनसे निचली अदालत में सुनवाई का सामना करने को कहा था.

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ट्रस्टों के नाम पर बड़ी मात्रा में धन की हेराफेरी की गयी थी

उससे पहले 19 मार्च, 2014 को हाईकोर्ट ने निचली अदालत में उस सुनवाई को सही ठहराया था. भ्रष्टाचार निरोधक आयोग (एसीसी) ने उन पर भ्रष्टाचार के दो आरोप लगाये थे. एसीसी का आरोप है कि यह ट्रस्ट और एक अन्य ट्रस्ट – जिया चैरिटेबल ट्रस्ट बस कागजों पर थे तथा जब जिया 2001-2006 की बीएनपी सरकार के दौरान प्रधानमंत्री थीं तब इन दोनों संगठनों के नाम पर बड़ी मात्रा में धन की हेराफेरी की गयी थी.

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