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Ranchi, 06 October : झारखंड में जहां गांजा की खेती एवं बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित है. वही रांची समाहरणालय के पास गांजे के 20 से 25 पौधे खड़े नजर आते हैं. यह पौधा आखिर कहां से आया इस संबंध में वहां मौजूद कोई कुछ नहीं बता पाए. सूत्रों के मुताबिक समाहरणालय परिसार के आस-पास गंजेड़ियों का अड्डा लगा रहता है. वे लोग दिन में सिगरेट में डाल कर गंजा सेवन करते है. वही साम में जब सभी कार्मचारी और अधिकारी कार्यलय से चाले जाते है तो चिलम में गंजा भर के सेवन किया जाता है. वे लोग अपने बैठने के लिए झाडोतोलन का चबुतरा का प्रयोग करते है. जहां गांजा को रगड़कर तैयार करते है और बीज को झाड़ीयो में फेक देते है. इसी तरह के फेंके हुए बीजों से करीब 20 से 25 गांजा के पौधे जो करीब 2 से 5 फीट तक के हो गये है. जबकि राज्य में गंजा की खेती और विक्री पूरी तरह है प्रतिबंधित है.
कहां है पौधे
गंजा के 20 से 25 पौधे जो करीब 2 से 5 फिट तक बड़े है, वह रांची समाहरणालय के ठीक समाने है. समाहरणालय के दरवाजे के करीब 100 मीटर से भी कम दूरी पर झाड़ियो में है यह पैधा. इस स्थान पर कभी टाउन हॉल हुआ करता था. अब नये टाउन हॉल के लिए नीव कोड़ी गयी है पुराने टाउन हॉल और जहां से समाहरणालय की चारदिवारी है, उसी के आस पास विखरे हुए है गंजा के पेड़. रांची समाहरणालय में जिले के बड़े अधिकारियों की दफ्तर है. उनके वाहनों की पर्किंग भी उसी के पास है. वर्तमान समय में वहां जगह पानी से भी भरा हुआ है .




