
New Delhi : सलमान खान को काला हिरण शिकार मामले में सजा होने के बाद भारतीय वन्य जीव संरक्षण अधिनियम चर्चा में आ गया है. बता दें कि भारतीय वन्य जीव संरक्षण अधिनियम भारत सरकार द्वारा 1972 में पारित किया गया था. अधिनियम वन्यजीवों के अवैध शिकार, मांस और खाल के व्यापार पर रोक लगाने के लिए लाया गया. बाद में 2003 में इसमें संशोधन कर इसका नाम भारतीय वन्य जीव संरक्षण (संशोधित) अधिनियम 2002 रखा गया. साथ ही इसमें दंड और जुर्माना को और कठोर कर दिया गया. बता दें कि यह कानून केवल जंगली जानवरों ही नहीं, बल्कि सूचीबद्ध पक्षियों और पौधों को भी संरक्षण प्रदान करता है. हालांकि यह जम्मू और कश्मीर में लागू नहीं होता. वहां उनका अपना वन्य कानून है. एक खबर और कि जंगली जानवरों के बढ़ते शिकार के कारण पर्यावरण मंत्रालय ने नया प्रस्ताव रखा है. एक रिपोर्ट के अनुसार देश में 60 फीसदी बाघ रहते हैं, जिसमें साल 2015 में 78 बाघों का शिकार हो चुका है. अब तक शिकार करने पर 25 हजार तक का जुर्माने का प्रावधान है लेकिन अब ये 50 लाख तक हो सकता है.
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छह अनुसूचियां जो अलग-अलग तरह से वन्यजीवन को सुरक्षा प्रदान करती हैं
अनुसूची-1 और अनुसूची-2 – इसके द्वितीय भाग वन्यजीवन को पूरी सुरक्षा प्रदान करते हैं. इनके तहत अपराधों के लिए कड़ा दंड तय है.
अनुसूची-3 और अनुसूची-4- इसके तहत भी वन्य जानवरों को संरक्षण प्रदान किया जाता है लेकिन इस सूची में आने वाले जानवरों और पक्षियों के शिकार पर दंड बहुत कम हैं.
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अनसूची एक
अनुसूची एक में 43 वन्य जीव शामिल हैं. जिसमें धारा 2, धारा 8, धारा 9, धारा 11, धारा 40, धारा 41, धारा 43, धारा 48, धारा 51, धारा 61 और धारा 62 के तहत दंड मिल सकता है. इस सूची में सुअर से लेकर कई तरह के हिरण, बंदर, भालू, चिकारा, तेंदुआ, लंगूर, भेड़िया, लोमड़ी, डॉलफिन, कई तरह की जंगली बिल्लियों, बारहसिंगा, बड़ी गिलहरी, पेंगोलिन, गैंडा, ऊदबिलाव, रीछ और हिमालय पर पाये जाने वाले कई जानवरों के नाम शामिल हैं. अनुसूची एक के भाग दो में कई जलीय जन्तु और सरीसृप हैं.
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अनुसूची दो
इस अनुसूची में शामिल वन्य जंतुओं के शिकार पर धारा 2, धारा 8, धारा 9, धारा 11, धारा 40, धारा 41 धारा 43, धारा 48, धारा 51, धारा 61 और धारा 62 के तहत सजा का प्रावधान है. – इस सूची के भाग एक में कई तरह के बंदर, लंगूर, सेही, जंगली कुत्ता, गिरगिट आदि शामिल हैं. सूची के भाग दो में अगोनोट्रेचस एण्ड्रयूएसी, अमर फूसी, अमर एलिगनफुला, ब्रचिनस एक्ट्रिपोनिस और कई तरह के जानवर शामिल हैं. अनुसूची पांच में उन जानवरों को शामिल किया गया है, जिनका शिकार हो सकता है. छठी अनुसूची में दुलर्भ पौधों और पेडों पर खेती और रोपण पर रोक है.
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सात साल की सजा व 25 लाख जुर्माना भी हो सकता है
अगर अनुसूची एक और दो में आने वाले जानवरों का शिकार किया गया है तो उसमें कम से कम तीन साल के जेल का प्रावधान है, हालांकि इस सजा को सात साल तक बढाया जा सकता है. कम से कम दस हजार रुपए जुर्माना हो सकता है. अधिकतम जुर्माना 25 लाख रुपए तक हो सकता है. दूसरी बार अपराध करने पर भी इतनी ही सजा का प्रावधान है, लेकिन कम से कम जुर्माना 25 हजार रुपए तक हो सकता है. इसके अलावा कानून के तहत जानवरों की खाल या फिर गलीचा इकट्ठा करना अपराध है. जिसमें एक से लेकर 25 लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकता है.
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