
गोडडा से हो रही लड़कियों की तस्करी के मामले में पुलिस पूरी तरह से अलर्ट हो चुकी है. तस्करों के चुंगुल से छुड़ाई गयी चार लड़कियों के बाद पुलिस प्रशासन की टीम अन्य 40 लड़कियों को मुक्त कराने के लिए कमर कस चुकी है. पुलिस अधिकारियों ने साफ कहा है कि किसी को डरने की जरूरत नहीं झारखंड की बेटियों को हम तस्करों के चंगुल से निकाल लायेंगे. बच्चीयों को उनके घर तक पहुंचायेंगे.
Deoghar: गोडडा से हो रही लड़कियों की तस्करी के मामले में पुलिस पूरी तरह से अलर्ट हो चुकी है. तस्करों के चुंगुल से छुड़ाई गयी चार लड़कियों के बाद पुलिस प्रशासन की टीम अन्य 40 लड़कियों को मुक्त कराने के लिए कमर कस चुकी है. पुलिस अधिकारियों ने साफ कहा है कि किसी को डरने की जरूरत नहीं झारखंड की बेटियों को हम तस्करों के चंगुल से निकाल लायेंगे. बच्चीयों को उनके घर तक पहुंचायेंगे.
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लड़कियों को मुक्त कराने के लिए गोड्डा डीसी ने विशेष टीम का गठन किया
इधर राजाभिट्ठा की एक लड़की गंभीर हालत में फरीदाबाद सदर अस्पताल में भर्ती है. लड़की के मां-बाप का पता चल गया है. पांच आदिवासी पहाड़िया लड़कियों के अलावा 40 अन्य लड़कियों को मुक्त करवा कर लाने के लिए गोड्डा डीसी ने विशेष टीम का गठन किया है. टीम फरीदाबाद पहुंच गयी है. गोड्डा प्रशासन ने टीम को निर्देश दिया है कि जितनी भी गोड्डा की जितनी लड़कियां वहां हैं, उसे मुक्त करवा कर सुरक्षित लाया जाये.
पुलिस प्रशासनिक टीम ने फरीदाबाद और दिल्ली पुलिस से मिलकर मामले में एफआइआर सहित पूरे केस का डिटेल्स लिया.पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों की टीम ने इलाजरत बच्ची के अलावा मुक्त करायी गयी अन्य चार लड़कियों से भी मुलाकात की और कहा कि अब किसी को डरने की जरूरत नहीं. हम सब आपके साथ हैं और अन्य को भी जल्द ही छुड़ाकर ले आयेंगे.
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” शक्तिवाहिनी संस्था झारखंड की बेटियों के साथ”
शक्तिवाहिनी के प्रवक्ता ऋषिकांत ने कहा है कि शक्तिवाहिनी संस्था झारखंड की बेटियों के साथ है. उनहोंने कहा कि झारखंड पुलिस की टीम को हमारी संस्था पूरा सहयोग करेगी. पुसिल मामले को गंभीरता से ले रही है और गिरफत में आये दलाल सुरेंद्र से जानकारीयां ले कर उसके आधार पर तहकीकीत कर रही है.
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टीम में ये हैं शामिल
टीम में गोड्डा के श्रम अधीक्षक संजय आनंद, जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी रीतेश कुमार, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी पद्मश्री कश्यप व पुलिस निरीक्षक पथरगामा रेणु गुप्ता शामिल हैं. टीम में संताली और पहाड़िया भाषा के जानकार भी हैं. संताली और पहाड़िया भाषा के जानकारों को टीम में रखने की वजह यह है कि जब लड़कियों को मुक्त कराया जाये, तो उनसे बातचीत करने में कोई परेशानी न हो और उनसे आसानी से बात की जा सके.
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