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रघुराम राजन पर जेटली का पलटवार, नोटबंदी, जीएसटी अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण सुधार  

NewDelhi : आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन द्वारा पिछले वर्ष भारत की विकास दर में गिरावट के लिए नोटबंदी तथा वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को जिम्मेदार ठहराना जाना वित्त मंत्री अरुण जेटली को नागवार गुजरा.  इस क्रम में रविवार को अरुण जेटली ने राजन पर हमलावर रुख अपनाया.   बता दें कि वित्त मंत्री ने बैंकिंग व्यवस्था में फैली कुव्यवस्था के लिए आरबीआई को आड़े हाथों लिया. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने नोटबंदी तथा जीएसटी का बचाव करते हुए कहा कि आलोचक और निंदक कहते हैं कि जीएसटी ने आर्थिक वृद्धि को धीमा किया है, लेकिन यह सुचारू रूप से लागू किया गया महत्वपूर्ण सुधार है. जेटली ने बैंकिंग प्रणाली में बढ़ रहे   एनपीए पर कहा कि बैंकों के एनपीए कम करने की जरूरत है और इस संबंध में उठाये गये कदमों का हमें फल मिल रहा है.  जेटली ने अपने आलोचकों को निशाने पर लेते हुए कहा, जीएसटी के कारण दो तिमाहियों में वृद्धि धीमी पड़ी, लेकिन लोगों ने इस पर ध्यान नहीं दिया कि उसके बाद किस तरह से वृद्धि तेज हुई. जान लें कि यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की 100वीं वर्षगांठ के अवसर पर वीडियो लिंक के जरिये वित्त मंत्री ने कहा कि दो तिमाही तक विकास दर में गिरावट के बाद यह बढ़कर सात प्रतिशत और उसके बाद 7.7 प्रतिशत पर पहुंच गयी. कहा कि अंतिम तिमाही में यह 8.2 प्रतिशत रही.

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जीएसटी का आर्थिक विकास दर पर केवल दो तिमाहियों के लिए बुरा असर हुआ

जेटली ने तंज कसा कि 2012-14 के दौरान 5-6 प्रतिशत विकास दर की तुलना में यह काफी ज्यादा है.  इस क्रम में जेटली ने कहा, आजादी के बाद सबसे बड़े कर सुधार जीएसटी का आर्थिक विकास दर पर केवल दो तिमाहियों के लिए बुरा असर हुआ. उन्होंने कहा कि बैंकिंग प्रणाली को मजबूती देने और भारत की विकास दर को सहारा देने के लिए हमें अपने एनपीए को कम करने की जरूरत है. वित्त मंत्री के अनुसार बैंकिंग प्रणाली की मजबती में सुधार लाने की जरूरत है, ताकि बाजार में तरलता बरकरार रहे.

याद करें कि रघुराम राजन ने शुक्रवार को कहा था कि नोटबंदी तथा जीएसटी की वजह से पिछले साल भारत की आर्थिक विकास दर में गिरावट आयी. कहा था कि मौजूदा सात फीसदी की विकास दर देश की जरूरतों के लिए पर्याप्त नहीं है.  वे बर्कले में यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफॉर्निया में शुक्रवार को लोगों को संबोधित कर रहे थे.  फ्यूचर ऑफ इंडिया पर दूसरा भट्टाचार्य व्याख्यान देने के क्रम में उन्होंने कहा था कि नोटबंदी तथा जीएसटी जैसे लगातार दो झटकों का भारत की विकास दर पर गंभीर असर पड़ा. विकास दर ऐसे वक्त में गिर गयी, जब वैश्विक अर्थव्यवस्था उछाल मार रही थी.

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