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अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला के खिलाफ एकजुट हो रहे बुद्धिजीवी

न्यूजविंग, रांचीः राष्ट्रीय स्तर पर अभिव्यक्ति की आजादी पर हो रहे हस्तक्षेप और किसी मुद्दे पर असहमति पर ‘पाबंदी‘ के खिलाफ झारखंड में कई सामाजिक और सांस्कृतिक संगठनों के अलावा बुद्धिजीवी एकजुट हो रहे हैं। इस हस्तक्षेप और पाबंदी के खिलाफ साथ ही यहां आन्दोलन की रूपरेखा क्या होगी इसपर चर्चा करने के लिए शनिवार को राज्य के विभिन्न सामाजिक, नागरिक और जन संस्कृति मंच के प्रतिनिधियों के अलावा शहर के बुद्धिजीवियों और पत्रकारों ने मंथन किया। यह आयोजन मानवाधिकार व सामाजिक कार्यकर्ता फादर स्टेन स्वामी की पहल नर पुरूलिया रोड स्थित जेवियर सामाजिक संस्थान, एक्सआईएसएस में करीब ढाई घंटे तक चला। सदस्यों ने अपने विचार रखे। जिसपर खुली चर्चा का दौर चला और तय हुआ कि अप्रैल के तीसरे या चैथे सप्ताह में शहर के किसी मुख्य स्थल पर एक जनसभा आयोजित की जायेगी। नागरिकों लोगों को बताया जायेगा कि पिछले दो सालों में नागरिकों के अधिकार को किस तरह प्रभावित किया जा रहा है। लोगों की अभिव्यक्ति की आजादी पर हमले हो रहे हैं। इस प्रदर्शन की तैयारी के लिए बैठक में पहुंचे सदस्यों ने स्वेच्छा से अपने नाम दिये हैं। हालांकि इस नवोदित मंच की यह पहली बैठक थी और कहा जा सकता है कि चर्चा के दौरान बनी सहमति के बाद इसे क्रियाशील बना दिया गया है। समय समय पर इसकी और भी बैठकें की जानी है जिससे इस मंच को मूर्त रूप दिया जा सकेगा। चर्चा की शुरूआत छत्तीसगढ़ में सामाजिक कार्यकर्ता बेला भाटिया को छत्तीसगढ़ छोड़ने के लिए बनाये जा रहे दबाव के साथ की गयी। बाद में सदस्यों ने झारखंड के भी मामले उठाये। इस अवसर पर मानवाधिकार कार्यकर्ता फादर स्टेन स्वामी, अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज, वरिष्ठ पत्रकार किसलय, सामाजिक कार्यकर्ता अनिल अंशुमन, पीपी वर्मा, अरविंद अविनाश, डाॅ सुनीता, वशिष्ठ तिवारी, गोपी नाथ घोष, दामोदर तुरी, धीरज, फादर एलेक्स एक्का, फादर जोसेफ मरयानुस कुजूर के अलावा आम लोग भी शामिल हुए।

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