
NewDelhi : CitizenShip Amendment Bill 2019 के खिलाफ कांग्रेस नेता जयराम रमेश व TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. जयराम रमेश ने अपनी याचिका में कहा है कि CAB भारत के धर्मनिरपेक्ष संविधान का उल्लंघन करता है.
कहा कि भेदभाव के रूप में यह मुस्लिम प्रवासियों को बाहर निकालता है और केवल हिंदुओं, सिखों, बौद्धों, ईसाइयों, पारसियों और जैनियों को नागरिकता देता है. यह संविधान की मूल संरचना और मुसलमानों के खिलाफ स्पष्ट रूप से भेदभाव करने का इरादा है.
जयराम रमेश ने कहा कि यह संविधान में निहित समानता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करता है और धर्म के आधार पर बहिष्कार करके अवैध आप्रवासियों के एक वर्ग को नागरिकता देने का इरादा रखता है. प्रत्येक नागरिक समानता के संरक्षण का हकदार है .
जयराम रमेश के अनुसार यदि कोई विधेयक किसी विशेष श्रेणी के लोगों को निकालता है तो उसे राज्य द्वारा वाजिब ठहराया जाना चाहिए. नागरिकता केवल धर्म के आधार पर नहीं, बल्कि जन्म के आधार पर हो सकती है. भारत जैसे धर्मनिरपेक्ष देश में नागरिकता योग्यता की कसौटी कैसे हो सकती है. CAB समानता और जीने के अधिकार का उल्लंघन है और इसे रद्द किया जाना चाहिए.
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TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने कैब के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की
इससे पहले TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने भी कैब के खिलाफ आज ही सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की. शुक्रवार को उन्होंने CJI एस ए बोबड़े से केस की जल्द सुनवाई की मांग की. CJI एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मोइत्रा के वकील ने याचिका का उल्लेख कर इसे शीघ्र सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया. उन्होंने कहा कि इस मामले को 13 दिसंबर यानी आज या फिर 16 दिसंबर को सूचीबद्ध किया जाये. CJI ने उनसे कहा कि आज सुनवाई नहीं होगी, आप रजिस्ट्रार के पास जायें.
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CAB को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द करने की मांग की गयी है
बता दें कि नागरिकता संशोधन विधेयक राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के दस्तखत के बाद कानून बन चुका है. इस कानून के खिलाफ पूर्वोत्तर राज्यों में काफी प्रदर्शन हो रहा है. प्रदर्शनकारियों की मांग है कि इसे तत्काल रद्द किया जाए. नागरिकता संशोधन कानून का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है. नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ पीस पार्टी ने भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है.
याचिका में कानून को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द करने की मांग की गयी है. पार्टी का कहना है कि यह कानून भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करता है. यह संविधान की मूल संरचना / प्रस्तावना के खिलाफ है. धर्म के आधार पर नागरिकता नहीं दी जा सकती. शुक्रवार को पीस पार्टी के नेताओं ने भी सुप्रीम कोर्ट में नागरिकता विधेयक के खिलाफ याचिका दायर की है.
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