
Kumar Gaurav, Ranchi: पिछले वर्ष एनसीईआरटी की किताबों के सप्लाई की भारी कमी हो गई थी. जिसका फायदा सभी स्कूलों ने जमकर उठाया और प्राईवेट पब्लिकेशन की किताबें चलाकर शिक्षा के व्यवसायीकरण का खूब फायदा उठाया. इस बार जिला प्रशासन ने पहले से ही सभी निजी स्कूलों से वर्गवार बच्चों के संख्या की सूची मांगी थी, ताकि केंद्र द्वारा जारी निर्देश के तहत सभी स्कूलों को एनसीईआरटी की किताबें दे दी जा सके. सरकार ने अपने तरफ से कोई कसर नहीं छोड़ा था, लेकिन प्राईवेट स्कूलों ने अपनी रोटी सेंकने पूरी तैयारी कर रखी है. विभागों के निर्देश की परवाह किए बिना सभी ने अपने स्कूलों के किताब किसी खास दुकान से मिलकर बेचने की तैयारी कर ली है. सीबीएससी के गाइडलाइन के तहत कोई भी स्कूल अपने यहां किताब, यूनिफॉर्म, स्टेशनरी की खरीद-बिक्री नहीं कर सकता. वहीं स्कूल की मनमानी को लेकर अभिभावक संघर्ष समिति स्कूल प्रबंधन के खिलाफ सभी स्तर पर शिकायत कर चुकी है.
Kumar Gaurav, Ranchi: पिछले वर्ष एनसीईआरटी की किताबों के सप्लाई की भारी कमी हो गई थी. जिसका फायदा सभी स्कूलों ने जमकर उठाया और प्राईवेट पब्लिकेशन की किताबें चलाकर शिक्षा के व्यवसायीकरण का खूब फायदा उठाया. इस बार जिला प्रशासन ने पहले से ही सभी निजी स्कूलों से वर्गवार बच्चों के संख्या की सूची मांगी थी, ताकि केंद्र द्वारा जारी निर्देश के तहत सभी स्कूलों को एनसीईआरटी की किताबें दे दी जा सके. सरकार ने अपने तरफ से कोई कसर नहीं छोड़ा था, लेकिन प्राईवेट स्कूलों ने अपनी रोटी सेंकने पूरी तैयारी कर रखी है. विभागों के निर्देश की परवाह किए बिना सभी ने अपने स्कूलों के किताब किसी खास दुकान से मिलकर बेचने की तैयारी कर ली है. सीबीएससी के गाइडलाइन के तहत कोई भी स्कूल अपने यहां किताब, यूनिफॉर्म, स्टेशनरी की खरीद-बिक्री नहीं कर सकता. वहीं स्कूल की मनमानी को लेकर अभिभावक संघर्ष समिति स्कूल प्रबंधन के खिलाफ सभी स्तर पर शिकायत कर चुकी है.

तीन साल से पहले नहीं बदल सकते किताब, एनसीईआरटी की किताबों से ही होनी है पढ़ाई
केंद्र सरकार के एचआरडी मंत्रालय के आदेश के हिसाब से कोई भी बोर्ड या राज्य संचालित शिक्षा बोर्ड अपने स्कूल के सिलेबस का परिवर्तन हर वर्ष नहीं कर सकता, लेकिन सभी निजी स्कूल हरेक साल बिना विषय वस्तु के ही पन्ना दो पन्ना या सिर्फ कवर पेज बदलकर अभिभावकों को नई किताबें खरीदने को मजबूर कर रहे हैं. सीबीएसई अपने गाईडलाईन में यह स्पष्ट कर चुका है कि सिर्फ एक दो चैप्टर के बदलाव के लिए पूरी किताब नहीं बदली जा सकती. स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबों के अलावा विभिन्न पब्लिकेशन की किताबों से पढ़ाई कराई जा रही है, जो किसी संबंधित दुकानों में ही मिल रहा है. इसलिए अभिभावक बाध्य हैं.
जिला शिक्षा अधीक्षक से की जा चुकी है कार्रवाई की मांग
अभिभावक संघर्ष समिति के एक प्रतिनिधि मंडल द्वारा जिला शिक्षा अधीक्षक से मिलकर संबंधित विषय पर कार्रवाई की मांग की गयी थी. एक बार फिर सभी अधिकार प्राप्त लोगों को इस बाबत जानकारी दी जाएगी और निगरानी से जांच कर कार्रवाई की मांग की जायेगी. समिति का कहना है कि सिर्फ व्यावसायिक हित के लिए स्कूल और पब्लिकेशंस अभिभावकों समेत पूरे शिक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंचा रहे हैं. इस खेल में रांची के शिक्षा माफियाओं के अलावा कुछ पूर्व अधिकारियों का भी हाथ है. सरकार से लेकर प्रशासन तक इस गोरख धंधे पर चुप्पी साधे हुए है.
स्कूलों ने अपने दुकानों का जारी कर दिया है लिस्ट
स्कूल प्रशासन बड़े ही चालाकी से अपने स्कूलों में चलाए जाने वाले किताबों की खरीद-बिक्री के लिए खास दुकानों से संपर्क कर चुके हैं, जहां से अभिभावकों को छात्र-छात्राओं के लिए किताब खरीदने के लिए कहा जा रहा है. अभिभावक संघर्ष समिति ने कुछ स्कूलों के नाम जारी किए हैं.
स्कूलों और संबंधित दुकानों की लिस्ट
टेंडर हार्ट- न्यू बुक सेंटर, डोरंडा
विशप वेस्टकार्ट- न्यू बुक सेंटर, डोरंडा
ऑक्सफोर्ड पब्लिक स्कूल- न्यू बुक सेंटर,डोरंडा
लोयला कांन्वेंट- न्यू बुक सेंटर, डोरंडा
डीपीएस- एलिट बुक
संत चार्ल्स- एलिट बुक
सेक्रेट हार्ट- एलिट बुक
संत जेवियर- एलिट बुक
लारेटो कान्वेंट- एलिट बुक
सरला बिरला- एलिट बुक
संत थामस- स्टूडेंट जेनेरल स्टोर
टॉरियन वर्ल्ड- स्टूडेंट जेनेरल स्टोर
केराली- निधि बुक
लाला लालजपत राय- आईडियल बुक
विशप वेस्टकॉट- प्रेम पुस्तकालय
मांउट फोर्ड- जय श्री पब्लिकेशंस
डान बास्को- जय श्री
एस डी ए बरियातू- जय श्री
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