
Ranchi: जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही हेमंत सरकार ने एक बार फिर दो अधिकारियों पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया है. दोनों अधिकारी प्रखंड विकास पदाधिकारी के पद पर रहे हैं. अपने एक निर्णय में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने हजारीबाग के कटकमदाग प्रखंड की तत्कालीन बीडीओ प्रीति सिन्हा के खिलाफ दो वेतन वृद्धि पर रोक का दंड यथावत रखे जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी है.
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वहीं दूसरे निर्णय में सीएम सोरेन ने रांची के बुंडू प्रखंड के तत्कालीन बीडीओ ( वर्तमान में निलबिंत ) ललन कुमार की सेवा बर्खास्त करने की स्वीकृति दी है. दोनों ही अधिकारियों पर केंद्र की महत्वाकांक्षी मनरेगा योजना में भ्रष्टाचार करने का आरोप है.
प्रति पंचायत 100 की जगह सृजन किया 19 मानव दिवस
बीडीओ प्रीति सिन्हा पर आरोप है कि उन्होंने मनरेगा योजनाओं में कई तरह धांधली की है. बीडीओ ने मनरेगा योजनाओं में न्यूनतम प्रतिदिन 100 मानव दिवस प्रति पंचायत सृजन के लक्ष्य के विपरित केवल 19 मानव दिवस के सृजन किया. इसके अलावा बीडीओ पर डोभा निर्माण में निर्धारित 507 के विपरित केवल 81 डोभा का क्रियान्वयन प्रारंभ कराने, केवल 28 प्रतिशत जॉब कार्ड का सत्यापन कराने, विभागीय निर्देशों के विरूद्ध वित्तीय वर्ष 2014-15 और 2015-16 तथा 2016-17 के लंबित योजनाओं को पूरा नहीं करने, मनरेगा योजनाओं के तहत कुल 13 प्रतिशत विलंबित भुगतान का मामला को यथावत रखने सहित केवल 6 प्रतिशत परिसंपत्तियों का ही जियो टैगिंग कराने का आरोप है.
जिला प्रशासन के अनुमित बिना मनरेगा में ललन कुमार ने किये काम
वहीं, निलंबित बीडीओ ललन कुमार पर आरोप है कि बुंडू प्रखंड के प्रखंड विकास पदाधिकारी रहते उन्होंने मनरेगा के तहत टुंगरी को हरा भरा करने के लिए सरकारी जमीन पर वृक्षारोपण की योजना बनायी. इसके लिए उन्होंने एक एनजीओ को बिना जिला प्रशासन के अनुमति का आदेश जारी कर दिया. जो कि निर्धारित प्रक्रिया एवं आदेश का उल्लंघन है. इसके अलावा ललन कुमार पर ग्रामीण विकास विभाग के द्वारा दिए गए निर्देशों के विरूद्ध गैर सरकारी संस्थानों को कार्यकारी एजेंसी के रूप में नामित किया. जबकि ऐसा करने के पहले उन्होंने जिला प्रशासन या जिला ग्रामीण विकास अभिकरण की अनुमति नहीं ली.
ललन कुमार पर लगा है अन्य निम्न आरोप
इसके अलावा निलबिंत अधिकारी पर मनरेगा के तहत वृक्षारोपण योजनाओं में समय पर मजदूरी भुगतान नहीं करने, फर्जी मास्टर रोल के आधार पर बिना सत्यापन के सरकारी राशि के भुगतान करने, मनरेगा अधिनियम के विपरीत बगैर मापी प्राप्त किए मास्टर रोल का सत्यापन करने, बगैर योजना स्थल का निरीक्षण किए कुल 23 योजनाओं में लगभग लगभग 47 लाख रुपये का अग्रिम भुगतान करने, मनरेगा अंतर्गत ग्रेड वन पथ, चेक डैम, वृक्षारोपण, तालाब निर्माण की 30 योजनाओं को अनाधिकृत रूप से लेने, ग्राम सभा का आयोजन फर्जी तरीके से करके 34 लाख रुपये का अग्रिम भुगतान करने का आरोप लगा है.




