Uncategorized

राजस्थान में पकड़ाया झारखंड के साईंनाथ यूनिवर्सिटी की फर्जी पीएचडी डिग्री

राजस्थान सरकार ने झारखंड सरकार को जांच के लिए लिखा पत्र 
Satyaprakash Prasad
Ranchi, 10 October :
 प्रज्ञान इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के बाद अब राज्य की एक और यूनिवर्सिटी विवादों में अा गया है. झारखंड के साईनाथ यूनिर्वसिर्टी का पीएचडी डिग्री फर्जी पाया गया है. साईनाथ यूनिवर्सिटी रांची में मोरहाबादी-अोरमांझी रोड पर चंदवे चौक के पास है. राजस्थान में यूनिर्वसिर्टी स्तर पर शिक्षकों की बहाली के दौरान दो अभ्यर्थियों की पीएचडी डिग्री सरकार ने यूजीसी गाइन लाइन के अनुरुप नहीं पाया. इसके बाद इनकी डिग्रियों की जांच की गयी. जांच में पता चला कि बिना कोर्स वर्क कराये ही ही साईनाथ यूनिवर्सिटी लोगों को फर्जी डिग्री प्रदान कर देता है. मामले को गंभीरतापूर्वक लेते हुए राजस्थान सरकार ने झारखंड सरकार को पत्र लिखकर साईनाथ यूनिवर्सिटी द्वारा जारी फर्जी डिग्रीयों की जांच करने करने का अाग्रह किया है. पत्र के मुताबिक साईनाथ यूनिवर्सिटी द्वारा दी गयी डिग्रियां यूजीसी गाइड लाइन के अनुसार नहीं है. बिना की कोर्स वर्क के अभ्यर्थियों को पीएचडी देना यूजीसी गाइडलाइन का उल्लंघन है.  

इसे भी पढ़ेंः ना बिल्डिंग, ना कार्यालय, दे दी विश्वविद्यालय की मान्यता, रघुवर दास ने प्रोस्पेक्टस भी जारी कर दी

उच्च शिक्षा व तकनीकि विभाग ने शुरु की जांच

राजस्थान सरकार का पत्र मिलने के बाद झारखंड की उच्च शिक्षा व तकनीकि संस्थान ने मामले की जांच शुरु कर दी है. राजस्थान सरकार ने झारखंड सरकार के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग को पत्र भेज कर फर्जी डिग्रीयों की जांच करने के लिए कहा है. राजस्थान सरकार ने इस बात पर भी चिंता जाहिर की है कि झारखंड के कई निजी विश्वविद्यालयों में यूजीसी के अनुरूप पीएचडी और एमफील की डिग्रीयां नहीं दी जा रही है. वहीं उच्च शिक्षा एवं तकनीकी विभाग ने साईनाथ विश्वविद्यालय के फर्जी की जांच अपने स्तर से आरंभ कर दी है.  

इसे भी पढ़ेंः प्रज्ञान विश्वविद्यालय की मान्यता देने का मामला : सरकार ने कैबिनेट, विधानसभा व राज्यपाल को अंधेरे में रखा
जानकारी नहीं, दो साल से बंद है पीएचडीः एसपी अग्रवाल

झारखंड साईनाथ यूनिवर्सिटी के कुलसचिव एसपी अग्रवाल ने बताया कि फर्जी डिग्री मामले की उन्हें जानकारी नहीं है. लेकिन पीएचडी के लिए यूजीसी गाइड लाईन 2009 में आया था. इसको धरातल पर लाने के लिए यूनिवर्सिटी में इसका क्रियाव्यन 2012 से किया गया. इससे पहले के पीएचडी छात्रों का कोर्स वर्क नहीं हो सका है. वर्तमान में विश्वविद्यालय ने पिछले दो सालों से पीएचडी कोर्स को बंद कर दिया है.

इसे भी पढ़ेंः मोमेंटम झारखंड में 225 करोड़ एमअोयू करने वाला प्रज्ञान फाउंडेशन कोलकाता पुलिस की गिरफ्त में

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

Back to top button