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कांग्रेस में कलहः सिब्बल ने कहा- पद नहीं, देश मायने रखता है, अनिल शास्त्री ने दी सोनिया-राहुल को सलाह

संजय झा का तंज- यह अंत की शुरुआत है

New Delhi: कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर शुरू हुआ घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है. सोमवार को सीडब्ल्यूसी की बैठक में हुए हंगामे के बाद भी विवाद जारी है. कांग्रेस में पूर्णकालिक अध्यक्ष एवं सामूहिक नेतृत्व की पैरवी करते हुए सोनिया गांधी को पत्र लिखने वाले नेताओं में शामिल कपिल सिब्बल का ट्वीट इसी ओर इशारा करता है. उन्होंने मंगलवार को कहा कि यह किसी पद के लिए नहीं, बल्कि देश के लिए है जो उनके लिए सबसे ज्यादा मायने रखता है. इधर कांग्रेस नेता अनिल शास्त्री ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी को सलाह दी है.

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यह पद के लिए नहीं- सिब्बल

उन्होंने ट्वीट किया, ‘यह पद के लिए नहीं है. यह मेरे देश के लिए है, जो सबसे ज्यादा महत्व रखता है.’


गौरतलब है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सिब्बल ने यह टिप्पणी उस वक्त की है कि जब एक दिन पहले ही कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में राहुल गांधी की एक कथित टिप्पणी और फिर उन पर सिब्बल की तरफ से निशाना साधे जाने के बाद विवाद हो गया था. बाद में सिब्बल ने कहा कि खुद राहुल गांधी ने उन्हें सूचित किया कि उनके हवाले से जो कहा गया है वो सही नहीं हैं और ऐसे में वह अपना पहले का ट्वीट वापस लेते हैं.

सिब्बल ने ट्वीट किया, ‘‘राहुल गांधी ने व्यक्तिगत तौर पर मुझे सूचित किया कि उन्होंने वो कभी नहीं कहा था जो उनके हवाले से बताया गया है. ऐसे में मैं अपना पहले का ट्वीट वापस लेता हूं.’’

इससे पहले सिब्बल ने कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक में राहुल गांधी की एक कथित टिप्पणी को लेकर उनपर कटाक्ष करते हुए ट्वीट किया था कि उन्होंने पिछले 30 वर्षों में भाजपा के पक्ष में कोई बयान नहीं दिया, इसके बावजूद ‘हम भाजपा के साथ साठगांठ कर रहे हैं.’

खबरों में कहा गया था कि राहुल गांधी ने पत्र लिखने वाले नेताओं पर भाजपा के साथ साठगांठ का आरोप लगाया, हालांकि बाद कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि राहुल गांधी ने सीडब्ल्यूसी की बैठक में ऐसी कोई टिप्पणी नहीं की.

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अनिल शास्त्री की सलाह

कांग्रेस में छिड़े घमासान के बाद पार्टी के कई नेता मुखर हो गये हैं. वहीं पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री के छोटे बेटे अनिल शास्त्री ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को सलाह दी है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व में कुछ चीजों की कमी है. सबसे जरूरी बात यह है कि पार्टी नेताओं के बीच बैठकें नहीं होती हैं. वहीं अगर राज्यों के पार्टी नेता दिल्ली जाते हैं तो सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने मिलना आसान नहीं होता है. उन्होंने कहा कि सोनिया और राहुल गांधी अगर पार्टी के नेताओं से मिलने लगे तो 50 प्रतिशत समस्याएं सुलझ जायेंगी.

यह अंत की शुरुआत है- संजय झा

वहीं कांग्रेस से निलंबित नेता संजय झा ने मंगलवार को ट्वीट कर तंज कसा है. उन्होंने कहा कि यह अंत की शुरुआत है. इससे कुछ दिन पहले ही संजय झा ने कहा था कि कांग्रेस को 100 से ज्यादा नेताओं ने लीडरशिप में बदलाव को लेकर सोनिया गांधी को पत्र लिखा. हालांकि. उस वक्त कांग्रेस ने इससे इनकार कर दिया था.

उल्लेखनीय है कि सोमवार को कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में हंगामा हुआ था. एक ओर जहां राहुल गांधी ने पत्र की टाइमिंग को लेकर सवाल उठाये. वहीं सात घंटे के मंथन के बाद सोनिया गांधी 6 महीने के लिए अंतरिम अध्यक्ष बनी रहने के लिए सहमत हो गयी. लेकिन नेतृत्व परिवतर्न को लेकर जिन नेताओं ने पत्र लिखे उनपर बीजेपी से मिले होने का आरोप भी हावी हुआ. इन विवादों के बीच गुलामनबी आजाद और कपिल सिब्बल भी नाराज नजर आये.

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