नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव का नतीजा सामने आने के बाद अब सबकी निगाह दिल्ली की प्रदेश सरकार पर लगी हुई है। अरविंद केजरीवाल के इस्तीफा देने के बाद से दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लगा हुआ है। बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी है लेकिन उसकी ओर से अभी सरकार बनाने की कोई कोशिश नजर नहीं आई है। दूसरी ओर आम आदमी पार्टी के पास दोबारा कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाने का मौका है लेकिन वो भी इससे इनकार ही करती दिख रही है।
दिल्ली में नई सरकार की पहली उम्मीद कल दिखी जब आम आदमी पार्टी के कुछ विधायकों ने पार्टी अध्यक्ष अरविंद केजरीवाल से दोबारा सरकार बनाने और अपनी पिछली गलती सुधारने की अपील की। इस अपील के सामने आते ही कांग्रेसी खेमे से भी सकारात्मक संकेत मिलने लगे और पार्टी नेता शकील अहमद ने कहा कि अगर आप की ओर से ऐसा कोई प्रस्ताव आता है तो पार्टी उसपर विचार करेगी। लेकिन इसके कुछ देर बाद ही आम आदमी पार्टी और उसके शीर्ष नेताओं ने ट्वीट कर साफ कर दिया कि दोबारा सरकार बनाने का कोई सवाल ही नहीं है और पार्टी दोबारा विधानसभा चुनाव की अपनी मांग पर अड़ी है।
आज हो रही पार्टी की राजनीतिक मामलों की कमेटी में भी कुछ नेताओं की राय थी कि पार्टी पर जो भगौड़े का ठप्पा लगा है वो तभी मिट पाएगा जब हम सरकार बनाकर उसे मिटाएंगे लेकिन दूसरे धड़े का कहना है कि इससे जनता में गलत राय ना चली जाए कि हम अवसरवादी हैं। फिलहाल कोई आखिरी फैसला नहीं हुआ है। ऐसे में अब सबकी निगाह उपराज्यपाल नजीब जंग के अगले कदम पर लगी है।
बीजेपी पूरे घटनाक्रम पर निगाह बनाए हुए है। उसके पास सरकार बनाने के कुछ ही चांस हैं लेकिन वो किसी जोड़तोड़ की कोशिश में जुटी नहीं दिखना चाहती। बीजेपी सूत्र बताते हैं कि पार्टी उपराज्यपाल के अगले कदम का इंतजार कर रही है। अगर उपराज्यपाल उसे सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करते हैं तो वो इस दिशा में कदम बढ़ा सकती है और उसपर विधायकों को तोड़ने के आरोप भी नहीं लगेंगे।
बीजेपी नेता जगदीश मुखी ने कहा कि फैसला तब होगा जब एलजी तय करेंगे कि होना क्या है। उसके बाद ही सभी पार्टियां अपना रुख साफ करेंगी। भाजपा के सामने दिल्ली को लेकर सारे विकल्प खुले हैं। पार्टी के एक अन्य सीनियर नेता वीके मलहोत्रा ने कहा कि अभी तक बॉल आम आदमी पार्टी के पाले में है लेकिन इनकी कथनी और करनी में फर्क है। हमें अंदर की खबर है कि ये कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाने की जोड़ तोड़ में लगे हैं। इन पर विश्वास नहीं किया जा सकता। बीजेपी अभी सारी परिस्थितियों को देखते हुए ही आगे की रणनीति तय करेगी।




