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Ranchi, 16 September : कहते है जिंदगी का कोई भरोसा नहीं. ये कब किसे दगा दे जाये कुछ पता नहीं. ऐसी ही जिंदगी की आंखमिचौली का किस्सा बन गयी आठ साल की नन्ही परी अंजलि और तीन साल का केशव. अंजलि की चाहत है कि वह बड़ी होकर इंजीनियर बने, पर उसके हालात ऐसे नहीं कि वह अपने सपनों को पूरा कर सके. चुटिया स्थित मकचुंद टोली निवासी शत्रुधन रजक के तीन संतान में दूसरी बेटी अंजलि और तीन साल के केशव है. इन दोनों बच्चों को क्युटिस लक्सा नामक गंभीर बीमारी ने अपने चपेट में ले रखा है. यह एक ऐसी बीमारी है, जिसमें व्यक्ति अपनी उम्र से कई गुणा ज्यादा बड़ा दिखने लगता है.
आठ साल की अंजलि ने बताया अपना दर्द
इलाज के लिए नहीं है पैसे
अंजलि का जन्म 29 जुलाई 2008 और केशव का जन्म 2 अगस्त 2014 को हुआ. घर में खुशियों का माहौल था, पर शायद नियति को कुछ और ही मंजूर था. छह महीने बाद शत्रुधन को पता चला कि उनके बच्चों को एक ऐसी बीमारी है जिसमें वह अपनी उम्र से बहुत ज्यादा बड़े दिखने लगे. पड़ोसियों की सलाह पर शत्रुधन अपने बच्चों को ले कर रिम्स जांच करवाने के लिए गये. वहां डॉक्टर ने अंजलि और केशव का स्किन सैंपल को मुंबई जांच के लिए भेजा. रिपोर्ट आने पर पता चला कि बच्चों को ऐसी बीमारी हो गयी है, जिसका इलाज भारत में नहीं है. पूरे विशव में 200 से ज्यादा लोग है जिन्हे क्युटिस लक्सा बीमारी ने अपने चपेट में ले रखा है. पेशे से धोबी शत्रुधन के पास इतना पैसा नहीं है कि वह अपने बच्चों को इलाज के लिए देश से बहार ले जाये. अब तक अपनी क्षमता से बढ़ कर तीन लाख रुपये इलाज में खर्च कर चुके हैं. पर अब हालत ऐसी हो गयी है कि बच्चों के इलाज का खर्च नहीं उठा सकते है.
बच्चों के पिता ने बयां की अपनी पीड़ा
स्वास्थ्य मंत्री ने दिया था इलाज का भरोसा
बच्चों के पिता शत्रुधन रजक ने कहा कि झारखण्ड के स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी ने उनहें रिम्स में निशुल्क जांच का भरोसा दिया था पर जांच के बाद भी हालत जस के तस बनी हुई है. वर्तमान में अंजलि और केशव का इलाज दिल्ली के एम्स में चल रहा है. पर अब आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं कि इलाज जारी रख पाएं. बच्चों के पिता ने सरकार और जनता से मदद की गुहार लगायी है.
इंजीनयर बनाना चाहती है अंजलि
चौथी क्लास में पढ़ रही अंजलि से जब उसके भविष्य के बारे में पूछा तो बोल बैठी कि इंजीनियर बनाना चाहती हूं. अंजली का पसंदीदा सबजेक्ट मैथ्स पसंदीदा विषय है. कभी-कभी स्कूल में क्लास के बच्चे उसे परेशान भी करते हैं, लेकिन सब बातों को भुला अंजलि अपने पढ़ाई पर ध्यान देती हैं.





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