National

आखिर ITBP के जवान दोबारा क्यों जाना चाहते हैं अफगानिस्तान? जानें हाई कोर्ट ने क्या कहा

New Delhi: अफगानिस्तान से 20 सालों के बाद अमेरिकी सैनिकों के जाने की वजह से तालिबान का दबदबा बढ़ता जा रहा है. तालिबानी आतंकियों का दावा है कि 90 फीसदी फीसदी अफगानिस्तान के हिस्से पर उनके लड़ाकों का कब्जा हो गया है. अफगान सेना लगातार अपने इलाकों को तालिबानियों के चंगुल से छुड़ाने का प्रयास कर रही है. इस पूरे हालात को देखते हुए भी भारत तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के कुछ जवानों की ओर से अफगानिस्तान में दोबारा से तैनाती के लिए हाई कोर्ट में याचिका लगाई गई. दिल्ली हाई कोर्ट ने भारत तिब्बत सीमा पुलिस के 30 जवानों की ओर से हिंसा प्रभावित अफगानिस्तान में फिर से तैनाती के लिए दायर याचिका को खारिज कर दिया. हाई कोर्ट ने कहा कि हमें आश्चर्य हो रहा कि कोई भी वहां इस खतरनाक स्थिति में वापस जाने का इच्छुक होगा.

 

इसे भी पढ़ें : Tokyo Olympics: समापन आज, जानें-किन-किन उपलब्धियों की वजह से इस आयोजन को याद करेंगे भारतीय

 

न्यायमूर्ति राजीव सहाय एंडलॉ और न्यायमूर्ति अमित बंसल की पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता, आईटीबीपी जैसे सशस्त्र बलों के कर्मियों के रूप में आवश्यकता के आधार पर कहीं भी तैनात किए जा सकते हैं. हालांकि उनके पास अफगानिस्तान में तैनात होने का कोई निहित अधिकार नहीं है. याचिकाकर्ताओं की भारत आने से पहले कंधार में तैनाती थी.

 

ITBP की अफगानिस्तान में एक यूनिट काबुल में भारत के दूतावास और कंधार में वाणिज्य दूतावास की सुरक्षा के लिए तैनात है. सूत्रों के अनुसार आईटीबीपी विदेश में ड्यूटी के लिए विदेश मंत्रालय को रिपोर्ट देता है और चयनित कर्मियों को अतिरिक्त भत्ते और अन्य सुविधाएं मिलती हैं. अफगानिस्तान में बिगड़े हालात और तालिबान के बढ़ते दखल के बाद भारत ने कंधार में अपने दूतावास को अस्थायी रूप से बंद करने का फैसला किया.

 

ITBP की ओर से पेश हुए वकील गौरांग कंठ ने तर्क दिया कि एक विदेशी मिशन में कर्मियों की तैनाती, डी-इंडक्शन और री-इंडक्शन विशुद्ध रूप से प्रशासनिक मामले हैं. पीठ ने इस तर्क पर सहमति व्यक्त की और यह माना कि अदालत यह तय नहीं कर सकती कि आईटीबीपी के कर्मियों को कहां और कैसे तैनात किया जाना चाहिए.

Related Articles

Back to top button