
Ranchi: उत्पाद विभाग ने इस साल विपरीत परिस्थितियों में लक्ष्य से ज्यादा राजस्व उगाही करने के लिए एक्शन प्लान बनाया है. उत्पाद आयुक्त भोर सिंह यादव ने बताया कि उत्पाद विभाग कि ओर इस वित्तीय वर्ष में 1000 करोड़ राजस्व उगाही का लक्ष्य तय किया गया है. हम तय लक्ष्य से ज्यादा राजस्व का उम्मीद करते हैं. इसके लिए हम कई सुधार के साथ योजना बना रहे हैं.
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लक्ष्य से ज्यादा राजस्व के लिए क्या है योजना
उत्पाद आयुक्त ने बताया कि हम पूरे झारखंड में शराब बेचकर हमें हर रोज औसतन 5 करोड़ राजस्व मिल रहा है. इससे साल में 912 करोड़ राजस्व मिलेगा. साथ ही बार और दूसरे नये लाइसेंस और उसके रिन्यूअल से भी राजस्व बढ़ेगा.
शराब की बोतलों पर होगा ट्रैक एंड ट्रेस सिस्टम
उत्पाद आयुक्त भोर सिंह यादव ने बताया कि हम ऐसा सिस्टम डेवलप करने जा रहे हैं जिससे एक-एक बोतल की मॉनिटरिंग की जा सकती है. यह ट्रैक एंड ट्रेस सिस्टम होगा. जिसमें झारखंड के सभी शराब की बोतलों में एक खास बार कोड होगा, जो सभी बोतलों के लिए अलग-अलग होगा. इससे हर एक बोतल की मॉनिटरिंग की जा सकेगी. अगर कहीं अवैध रूप से शराब की बड़ी खेप पकड़ी जाती है तो बार कोड के जरिये तुरंत पता लग जायेगा कि वह किस ईलाके के किस दुकान से खरीदी गई है. उसके बाद संबंधित दोषी के खिलाफ कार्रवाई की जा सकेगी.
ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ेंगी शराब की दुकानें
झारखंड के सुदूरवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 150 नई शराब की दुकानें खोली जायेंगी. उत्पाद आयुक्त का कहना है कि झारखंड के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में शराब की जरूरत पूरा करने के लिए दूसरे पड़ोसी राज्यों से अवैध तरीके से शराब की खपत की जा रही है. इससे झारखंड सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है. इसे रोकने के लिए ग्रामीण शहरी इलाकों में जगह चिन्हित की जा रही है. आने वाले कुछ समय में करीब 150 शराब के नये दुकान खुलेंगे.
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इंफोर्समेंट टीम में दूर की जायेगी मैनपावर की कमी
भोर सिंह यादव ने बताया कि उत्पाद विभाग में कार्रवाई के लिए बनी इंफोर्समेंट टीम में मैनपावर की कमी है. अभी करीब 80 लोगों की टीम है, जबकि दूसरे राज्यों में उत्पाद विभाग के लिए इंफोर्समेंट टीम काफी मजबूत है. यहां के इंफोर्समेंट टीम के खाली पदों को भरने के लिए सरकार के पास प्रस्ताव भेजा जायेगा. हमारे पास पर्याप्त टीम रहने से शराब के अवैध कारोबार पर अच्छी तरह नकेल कसी जा सकेगी.
कठोर कानून बनाने की जरूरत
उत्पाद आयुक्त ने कहा कि झारखंड में शराब को लेकर बने कानून बहुत लचीले हैं. जबकि दूसरे राज्यों में शराब के अवैध कारोबार के खिलाफ कठोर और नन बेलेबल कानून का प्रावधान है. यहां पर अवैध शराब कारोबारी पकड़े जाने पर दूसरे दिन ही बेल लेकर छूट जाते हैं.
उत्पाद विभाग को दुरूस्त करने के लिए दूसरे राज्यों की पॉलिसी की स्टडी
झारखंड के उत्पाद विभाग को दुरूस्त करने के लिए एक स्पेशल टीम कई राज्यों का दौरा कर रही है. इस टीम में उत्पाद विभाग के सचिव, उत्पाद आयुक्त, उत्पाद उपायुक्त, जीएम फाइनेंस जैसे अधिकारी शामिल हैं. अब तक टीम ने दिल्ली और छत्तीसढ़ जाकर वहां के उत्पाद विभाग की व्यवस्था का जायजा लिया है. उत्पाद आयुक्त ने बताया कि आने वाले दिनों में बंगाल, उत्तराखंड, कर्नाटक जैसे राज्यों के उत्पाद विभाग के व्यवस्था की स्टडी की जायेगी. इन राज्यों की व्यवस्था की समीक्षा कर हम फायदा देने वाली बातों को झारखंड में लागू करने के लिए सरकार के पास प्रस्ताव भेजा जायेगा.
नोट: शराब का सेवन सेहत के लिए हानिकारक है, न्यूजविंग इसके लिए कभी प्रेरित नहीं करता है.
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