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स्टैचू ऑफ यूनिटी से विस्थापित हुए आदिवासियों ने सरकार को सौंपा ज्ञापन

उधर ब्रिटेन में भी मचा बवाल, दिया गया एक बिलियन पाउंड का अनुदान, भारत ने खर्च कर दिये 330 मिलियन पाउंड से अधिक

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NW Desk : गुजरात के नर्मदा नदी तट पर बने स्टैचू ऑफ यूनिटी से विस्थापित हुए आदिवासियों ने सोमवार को ज्ञापन सौंप कर आधारभूत संरचना विकसित करने की सरकार से गुहार लगायी है. हजारों की संख्या में आये आदिवासियों ने अधिकारियों से कहा है कि स्टैचू ऑफ यूनिटी के स्थल पर विस्थापितों को भी सुविधाएं मुहैया करायी जाये.

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ग्रामीणों की मांग, स्थल पर आधारभूत सुविधाएं हों विकसित : रोहित प्रजापति

ग्रामीणों का नेतृत्व कर रहे रोहित प्रजापति ने कहा कि सरदार पटेल की 597 फीट प्रतिमा स्थापित करने में 400 मिलियन डॉलर खर्च किये गये. इसके उदघाटन में करोड़ों रुपये भी फूंके गये. कहा गया कि यह न्यूयार्क के स्टैचू ऑफ लिबर्टी से अधिक ऊंचा है.

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पुनर्वास और उचित मुआवजा देने की घोषणा

गुजरात के केवादिया शहर में किसानों, आदिवासियों की रैली में बेफिजुल खर्च का विरोध किया गया. मेधा पाटेकर ने पूर्व में भी कहा था कि गुजरात की भूमि, नदी और जंगल को आदिवासी अपना अवतार मानते हैं. गुजरात सरकार ने 185 विस्थापितों के बेहतर पुनर्वास और उचित मुआवजा देने की भी घोषणा की है. सरदार सरोवर डैम के डाउनस्ट्रीम में यह स्टैचू बनाया गया है. डैम से 3.20 लाख गरीब लोग विस्थापित हुए थे. इनमें से कई को अब तक मुआवजा नहीं मिला है.

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लंदन में भी मचा बवाल  

लंदन के लोग कह रहे हैं कि हमने एक बिलियन पाउंड का अनुदान दिया, भारत ने खर्च कर दिये 330 मिलियन पाउंड. लंदन में स्टैचू ऑफ यूनिटी को लेकर बवाल मचा हुआ है. लंदनवासी कह रहे हैं कि हमने स्टैचू के लिए एक बिलियन पाउंड की आर्थिक मदद भारत सरकार को की थी. पर भारत सरकार ने 300 मिलियन पाउंड खर्च कर दिये. यूनाईटेड किंग्डम (यूके) के करदाताओं ने स्टैचू के निर्माण को लेकर 1.17 बिलियन पाउंड की सहायता दी है. ब्रिटिश कर दाताओं ने 2013 में 268 मिलियन पाउंड, 2014 में 278 मिलियन पाउंड और 2015 में 185 मिलियन पाउंड की सहायता राशि दी. ब्रिटेन के सांसद पीटर बोन ने टिप्पणी भी की है कि स्टैचू बनाये जाने का कोई मकसद ही साबित नहीं होता है. यह कहना कि स्टैचू देखने के लिए लोग बरबस खींचे चले आयेंगे, बेबुनियाद बातें हैं. उन्होंने कहा है कि यदि किसी देश को आर्थिक मदद करने का यह अंजाम होता है, तो उसे सहायता रोक देनी चाहिए.

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महिलाओं के अधिकार और सोलर पैनल में खर्च

ब्रिटिश लोगों का कहना है कि उनके देश से मिलनेवाला अनुदान महिलाओं के अधिकार और सोलर पैनल की स्थापना में खर्च होना चाहिए. अनुदान की राशि से भारत में चल रही परियोजनाओं को संपोषित किया जाना चाहिए. स्टैचू बनाने में 35 सौ मजदूर लगे और चार साल का समय लगा. 72 गांवों की जमीन प्रोजेक्ट के लिए ली गयी. ब्रिटेन की तरफ से योग के लिए 86616 पाउंड खर्च किये जा रहे हैं, ताकि योग से हृदय रोग के मरीजों को बचाया जा सके. एक लाख पाउंड महिला वैज्ञानिकों के लिए खर्च किये जा रहे हैं. ये वैज्ञानिक कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से भारत जा रहे हैं.

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