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कंबल घोटालाः एजी ने झारक्राफ्ट से धागा कंपनी और फिनिशिंग करने वाली कंपनी से पेमेंट वापस लेने को कहा

  • एक ही गाड़ी से दो जगहों पर कंबल की ट्रांसपोर्टिंग की गयी.
  • विकास आयुक्त ने सारे भुगतान बंद कर कार्रवाई करने को कहा

Akshay Kumar Jha

Ranchi: झारखंड स्लिक टेक्सटाइल एंड हैंडक्राफ्ट डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड यानि झारक्राफ्ट का भवन बाहर से जितना खूबसूरत दिखता है. वहां काम करने वाले अधिकारियों का काम करने का कल्चर जितना साफ-सुथरा दिखता है. उतना है नहीं. उस पर करीब 18 करोड़ का कंबल घोटाला दाग लगा है. एक-के-बाद-एक एजी की करीब सात चिट्ठी से झारक्राफ्ट के होश फाख्ता हैं. उद्योग निदेशक ने जांच में पाया है कि झारक्राफ्ट ने कई मामलों में फर्जी तरीके के काम किया है. झारक्राफ्ट का कोई भी अधिकारी कुछ भी कहने से बच रहे हैं. कई अधिकारियों ने तो जानकारी होने के बावजूद मामले पर बात करने से इंकार कर दिया. घोटाले को अंजाम देने के लिए ऐसे-ऐसे खेल खेले गए, जिसे जानने के बाद कम-से-कम सखी मंडल से जुड़ी महिलाएं अपने-आप को जरूर ठगा हुआ महसूस कर रही हैं. न्यूज विंग ने करीब 500 से ज्यादा सखी मंडलों से पूछा,  लेकिन किसी ने यह नहीं कहा कि उन्हें कंबल बनाने का काम मिला है. पूछे जाने पर सखी मंडल की महिलाएं सरकार को कोस रही हैं. उनका कहना है कि सरकार ने पहले सस्ता और घटिया मोबाइल देकर ठगा. अब कंबल के बहाने रोजगार देने की बात कह कर सरकार ने ठगने का काम किया है.

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जिन कंपनियों को धागा खरीदने के नाम पर पैसे उसे वापस लोः एजी

एजी ने (महालेखाकार) अपने ऑडिट में कई ऐसी खामियां पायी है, जिसके बाद एजी ने अपनी तरफ से झारक्राफ्ट को लेटर लिखा है. इन्हीं चिट्ठी में से एक चिट्ठी धागा खरीदने और रफ कंबल को फिनिशिंग करने वाली कंपनियों के बारे में है. चिट्ठी में एजी ने लिखा है कि उन सभी कंपनियों से झारक्राफ्ट पैसे वापस ले, जिसे धागा सप्लाई करने और फिनिशिंग करने के नाम पर भुगतान किया गया है. एजी ने पाया है कि धागा खरीदने और फिनिशिंग के नाम पर काफी मात्रा में गोलमाल हुआ है. चूंकि जांच की प्रक्रिया खबर लिखे जाने तक जारी है, इसलिए कितने रुपए का घोटाला धागा खरीदने और कितने रुपए का घोटाला फिनिशिंग के नाम पर हुआ है, उसका पता नहीं चल पाया है.

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ट्रांसपोर्टिंग को लेकर एजी ने उठाए सवाल

झारक्राफ्ट में कंबल से संबंधित कागजातों का ऑडिट करते वक्त ट्रास्पोर्टिंग को लेकर एजी ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं. एजी ने पाया है कि सखी मंडल और बुनकर समिति से कंबल ढोए जाने के नाम पर गोल-माल हुआ है. बताया जा रहा है कि एक ही गाड़ी से ट्रांसपोर्टिंग का सारा काम करा लिया गया. जो कतई संभव नहीं है. जिस गाड़ी का लोकेशन रांची दिखाया जा रहा है उसी गाड़ी का लोकेशन 1400 किमी दूर उसी दिन  कहीं और भी दिखाया जा रहा है. ऐसे मामलों को लेकर एजी ने झारक्राफ्ट से सवाल पूछे हैं.

विकास आयुक्त ने भुगतना करने से मना किया   

एजी की चिट्ठी के बाद झारक्राफ्ट से लेकर सरकार के शीर्ष अधिकारी हरकत में हैं. विकास आयुक्त की तरफ से लातेहार से आयी एक शिकायत पर जांच करने का आदेश दिया गया है. लातेहार जिले के पोखरीतला से एक बुनकर को लेकर शिकायत की गयी थी. दरअसल कागजों पर झारक्राफ्ट ने एक बुनकर के पास उन्नत किस्म की जितनी बड़ी लुम (करघा) होने की बात कही थी, उद्योग निदेशक के स्तर की जांच में वो फर्जी पाया गया. उतनी उन्नत किस्म की लुम (करघा) बुनकर के पास है ही नहीं. शिकायत सही पाए जाने पर विकास आयुक्त अमित खरे ने बुनकर को किसी भी प्रकार के भुगतान पर रोक लगाने के निर्देश दिया है. साथ ही झारक्राफ्ट एमडी और उद्योग विभाग के एमडी को जिम्मेदार लोगों का पता लगा कर कार्रवाई करने को कहा है.

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