
RANCHI : रांची में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है, जिसमें एक तरफ दावा है, दूसरी ओर ऐतराज. दोनों के बीज सच क्या है, इसकी पड़ताल की गुंजाईश बनती है. पुलिस का दावा है कि सात मार्च को अपर बजार स्थित राहुल सिंघानिया के आवास से एक लड़की को रेसक्यू कर बचाया गया है. इस बारे में सिंघानिया परिवार ने इसे गलत ठहराते हुए पुलिस के रवैये पर ऐतराज जताया है. राहुल सिंघानिया की मां सीता सिंघानिया ने कहा कि जिस बच्ची को पुलिस यहां से ले गई है, उसे मैंने अपनी बेटी की तरह नौ साल अपने घर पर रखा है. उन्होंने कहा कि 2009 के अक्टूबर में मुझे रश्मि तिवारी और सिमरन तिवारी नामक बच्ची संत्संग के पास मिली थी.
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रोते हुए मांगा था सहारा
सीता सिंघानिया ने बताया कि जिस बच्ची को पुलिस मेरे घर से ले गई थी, उसका नाम रश्मि तिवारी है. इस बच्ची के साथ उसकी बड़ी बहन सिमरन भी मुझे सत्संग के पास मिली थी. उस दौरान फटे कपड़े दिखाते हुए सिमरन मेरे पीछे पड़ गई थी. कहने लगी की हमलोगों का कोई भी नहीं है, बाढ़ में घर, मां –बाप सब खत्म हो गए हैं. हमलोगों को अपने पास रख लो. तब वो दोनों रोने लगी थी. मैं दोनों को अपर बजार स्थित अपने घर ले आई. कुछ माह के बाद वो सिमरन अपने फूफा से मिलने के बहाने गई तो आजतक नहीं आई. लेकिन रश्मि उसके बाद से हमेशा मेरी बेटी की तरह रहने लगी. तब उसकी उम्र 13 साल थी. मैंने उसे पढ़ाने की बहुत कोशिश की, लेकिन उसकी रुचि नहीं थी.
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पुलिस ने बिना कुछ बताए ले गई
सिंघानिया परिवार का कहना है कि पुलिस सात मार्च को आती है और रश्मि को अचानक ले जाती है. राहुल सिंघानिया ने कहा कि जब हमलोगों ने पुलिस से पूछा कि कहां और क्यों ले जा रहे हैं, लेकिन पुलिस ने कुछ भी नहीं बताया. कहा कि आपलोग महिला थाना आइए. हमलोग महिला थाना गए, लेकिन वहां भी पुलिस ने कुछ भी नहीं बताया. सीता सिंघानिया ने कहा कि जब बच्ची को पुलिस ले जा रही थी, तब वो बहुत रो रही थी, वो जाने के लिए तैयार नहीं थी. उन्होंने कहा कि मेरा कहना है कि अगर बच्ची के मां-बाप हैं और वे लोग उसे ले जाना चाहते हैं तो ठीक है. लेकिन अगर ऐसा कुछ नहीं तो उसे मेरी बेटी की तरह मुझे वापस लौटाया जाए. साथ ही हमलोग यह मांग करते हैं कि बच्ची का उसके परिवार से डीएन टेस्ट जांच कर ही उसे सौंपा जाए.
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