
Ranchi: आठ जून 2015 को पलामू के सतबरवा थाना क्षेत्र के बकोरिया में हुए कथित मुठभेड़ में 12 लोगों के मारे जाने की घटना नए तथ्य सामने आए हैं. नया तथ्य यह है कि मुठभेड़ पलामू जिला के सतबरवा थाना क्षेत्र के बकोरिया में हुआ और मुठभेड़ करने वाली पुलिस की टीम में लातेहार जिला के मणिका में तैनात सीआरपीएफ की टीम थी. वह भी तब जब इस बात की जानकारी लातेहार के तत्कालीन एसपी को थी ही नहीं. इस तथ्य ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. जब मणिका में तैनात सीआरपीएफ अभियान में गयी थी, तो उसके साथ पलामू के सतबरवा थाना की पुलिस टीम क्या कर रही थी. मणिका थाना की पुलिस क्यों नहीं थी. जब एसपी को सीआरपीएफ के मूवमेंट की जानकारी नहीं थी, तो फिर किस सीनियर अफसर के आदेश पर मणिका में तैनात सीआरपीएफ की टीम सतबरवा थाना पुलिस के साथ अभियान में थी. उल्लेखनीय है कि कथित मुठभेड़ की घटना के कुछ दिन बाद ही लातेहार के एसपी अजय लिंडा का तबादला कर दिया गया था. उनके तबादले को भी कथित मुठभेड़ से जोड़ कर देखा गया था.
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बिना एसपी को सूचना दिए अभियान में कैसे निकली सीआरपीएफ, नहीं बना था कोई अॉपरेशन प्लान
नियमानुसार किसी भी जिला में तैनात सीआरपीएफ की टीम वहां के एसपी को सूचना देकर ही किसी अभियान में जाती है. सीआरपीएफ की टीम के साथ जिला पुलिस के अफसर का होना भी जरुरी होता है. साथ ही अभियान से पहले एसपी की सहमति से अॉपरेशन प्लान बनता है. इस अॉपरेशन प्लान की जानकारी सीआरपीएफ मुख्यालय को भी दी जाती है. बकोरिया में हुए कथित मुठभेड़ में लातेहार के मणिका में तैनात सीआरपीएफ जवानों को शामिल होना दिखाया गया है. जबकि एसपी को इसकी जानकारी नहीं थी. उल्लेखनीय है कि पलामू के तत्कालीन डीआइजी हेमंत टोप्पो ने अपने बयान में साफ कहा है कि जब आठ जून की रात डीजीपी डीके पांडेय ने फोन करके उनसे मुठभेड़ के बारे में सूचना दी थी, तब डीआइजी ने पलामू और लातेहार के एसपी से पूछा था. दोनों जिलों के एसपी ने पलामू डीआइजी को किसी तरह का मुठभेड़ होने की सूचना से इंकार किया था. सूत्रों ने यह भी बताया है कि कथित मुठभेड़ से पहले पलामू या लातेहार जिला की पुलिस और सीआरपीएफ ने कोई अॉपरेशन प्लान नहीं बनाया था. इसकी जानकारी सीआरपीएफ मुख्यालय को भी नहीं दी गयी थी.
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