
New Delhi: आर्थिक विश्लेषक रूचिर शर्मा का कहना है कि विश्व में सत्ता विरोधी लहर की सबसे अधिक दर भारत में है. उन्होंने यह भी कहा कि देश में आर्थिक विकास और चुनाव परिणामों के बीच सीमित संबंध है. न्यूयार्क में रहने वाले स्तंभकार और अर्थशास्त्री ने कहा कि हालांकि एक तथ्य भारत के लोकतंत्र की ताकत को दर्शाता है, अन्य मुद्दे इसकी कमी के कारण हैं. उन्होंने कहा कि भारत में तीन में से दो सरकारों को बाहर कर दिया जाता है. अमेरिका में, यह संख्या ठीक विपरीत है- वहां तीन में से दो को दोबारा चुना जाता है.
रूचिर शर्मा ने समाचार एजेंसी ‘पीटीआई’ को बताया कि मेरे लिए एक अच्छी खबर है क्योंकि इसका मतलब है कि धनबल और बाहुबल के बावजूद वे चुनाव हारते रहते हैं और यह औसत मतदाता के लिए बहुत बड़ी ताकत है जो यह जानता है कि चुनाव का समय आयेगा और मैं अपना बदला ले लूंगा.
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अपने नेताओं को बदलते रहते हैं भारतीय
उनकी नयी किताब ‘डेमोक्रेसी ऑन द रोड’ के 2019 चुनावों से पहले फरवरी में आने की उम्मीद है. उन्होंने कहा कि विश्व के अन्य भागों की तुलना में भारतीय लोग अपने नेताओं को लगातार बदलते रहते हैं. शर्मा के मुताबिक ऐसा इसलिए है क्योंकि भारत में नेता लम्बे समय तक सत्ता में रहते हैं और वे ‘अधिक अहंकारी’ बन जाते हैं, जिससे लोगों के भीतर ‘नेताओं को बदलने की भावना’ जागृत हो जाती है.
शर्मा ने फ्री-व्हीलिंग वार्तालाप के दौरान दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में कुछ कमियां भी सूचीबद्ध कीं. उन्होंने ईवीएम में छेड़छाड़ की बात कहने और देश की ‘मुक्त प्रेस’ को लेकर भय जताने वाले ‘समझदार लोगों’ की संख्या के बारे में चिंता भी जतायी.




