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केरल में फंसे लोगों का पता लगाने में हैम रेडियो से मिल रही मदद

Delhi/kolkata: केरल में एमेच्योर या हैम  रेडियो के संचालक विनाशकारी बाढ़ से जूझ रहे लोगों के लिए जारी बचाव अभियान में उल्लेखनीय भूमिका निभा रहे हैं. वे फंसे हुए लोगों का उनके मोबाइल फोन के आखिरी लोकेशन के जरिये पता लगा रहे हैं और संबंधित सूचना अधिकारियों तक पहुंचा रहे हैं.

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केरल में 300 से अधिक हैम संचालक 24 घंटे कर रहे हैं काम

हैम रेडियो संचालकों को केंद्रीय संचार मंत्रालय द्वारा तय खास रेडियो आवृत्ति तक इस तरह के संचार का लाइसेंस प्राप्त होता है. हैदराबाद स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एमेच्योर रेडियो के निदेशक राम मोहन सूरी ने बताया कि केरल में 300 से अधिक हैम संचालक 24 घंटे काम कर रहे हैं और बचाव अभियानों में प्रशासन की मदद कर रहे हैं. सूरी ने बताया कि 16 से 19 अगस्त के बीच हैम रेडियो के तिरूवनंतपुरम केंद्र से प्राप्त मदद के आधार पर 1,650 लोगों को बचाया गया है.

पश्चिम बंगाल एमेच्योर रेडियो क्लब के सचिव अंबरीश नाग विश्वास के मुताबिक मुर्शिदाबाद के पांच श्रमिकों को हैम रेडियो की मदद से बचाया गया. उन्होंने बताया कि मुर्शिदाबाद जिले के ये श्रमिक एर्नाकुलम जिले में तीन मंजिला एक मकान में फंस गए थे और फोन की बैटरी डिस्चार्ज होने के कारण वे किसी से संपर्क नहीं कर पा रहे थे.

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क्या है हैम रेडियो

एमेच्योर रेडियो को ही हैम रेडियो  कहा गया है और रेडियो ऑपरेटरों को हैम्स कहा जाता हैं. एमेच्योर का अर्थ है रेडियो और ऑपरेटर, जो सामाजिक कार्यो के प्रति वचनबद्ध हो या निजी शौक को पुरा करने के लिए बिना किसी आर्थिक मुआवजे के उससे जुड़ा रहता हो.

एमेच्योर का मतलब ऑपरेटर बिना आर्थिक लाभ के सामाजिक सहयोग के तैयार रहे. हैम रेडियो के लाइसेंस की लागत कमर्शियल लाइसेंसों से कम है. हैम रेडियो ऑपरेटर्स एक दूसरे के साथ रेडियो पर ही बात करना पसंद करते हैं. प्राकृतिक आपदाओं के दौरान या अन्य संचार साधनों के खराब होने पर स्थानीय क्षेत्रों की मदद करते हैं. हैम रेडियो बस शौक है और इसे वित्तीय लाभ के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाता है.

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