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कुरमी को एसटी सूची में शामिल करने मामले को टीआरआई के पास भेजने पर आजसू विधायक ने जतायी चिंता

Ranchi : कुरमी को आदिवासी सूची में शामिल किये जाने की सरकारी प्रक्रिया पर आजसू के टुंडी विधायक राजकिशोर महतो ने चिंता जाहिर की है. आजसू विधायक के चिंता की वजह टीआआई की रिपोर्ट है. इस मामले पर टीआरआई की रिपोर्ट को केंद्र सरकार पहले भी दो बार खारिज कर चुकी है. ऐसे में मुख्‍यमंत्री रघुवर दास के द्वारा इस कुरमी को आदिवासी सूची में शामिल किये जाने के विषय को टीआरआई को सौंपने का निर्देश कार्मिक विभाग को दिये जाने पर गहरी चिंता व्‍यक्‍त की है और इस विषय पर कुरमी नेताओं को गंभीरता पर विचार करने की अपील की है. उन्‍होंने कहा है कि इस पर कोई रास्‍ता निकालने की कोशिश करनी चाहिये.

कुरमी को आदिवासी सूची में शामिल करने के लिए टीआरआई की रिपोर्ट की जरूरत नहीं

आजसू के टुंडी विधायक राजकिशोर महतो ने कहा है कि कुरमी जाति को फिर से आदिवासी सूची में शामिल करने के लिए किसी टीआरआई की रिपोर्ट की जरूरत नहीं है. टुंडी विधायक ने इस विषय पर अपना तर्क देते हुए कहा है कि कुछ दिन पहले पूर्व सांसद शैलेंद्र महतो ने हस्‍ताक्षर अभियान चलाया है और 42 विधायकों और दो सांसदों का हस्‍ताक्षरयुक्‍त ज्ञापन सीएम रघुवर दास को सौंपा गया है. मुख्‍यमंत्री ने इस संबंध में टीआरआई को सौंपने का निर्देश कार्मिक विभाग को दिया है. जबकि इसकी जरूरत ही नहीं है.

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31 जुलाई 2015 को ट्राइबल अफेयर्स मंत्रालय ने खारिज कर दी थी टीआरआई की रिपोर्ट

उन्‍होंने कहा है कि अब तो मामला न राज्‍य सरकार के पास लंबित है और न केंद्र सरकार के पास. ऐसी परिस्थिति में कुरमी नेताओं को सही रास्‍ता ढूंढने की तैयारी करनी होगी. राजकिशोर महतो ने चिंता व्‍यक्‍त की है कि क्‍या फिर से टीआरआई की रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजी जायेगी. जिसे पहले ही दो बार खारिज किया जा चुका है. प्रतिनिधिमंडल के नेताओं को सीएम से जो प्रस्‍ताव 2004 में भेजा गया था, उस पर कोई चर्चा नहीं की. साल 2004 के 8 दिसंबर को सीएम अर्जुन मुंडा के द्वारा केंद्र सरकार को प्रस्‍ताव भेजा गया था. उसके बाद 2005 में ही झारखंड सरकार की टीआरआई की रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार ने प्रस्‍ताव खारिज कर दिया. उसके बाद 10 साल बाद 2014 को टीआरआई ने एक रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजी. जिसे 31 जुलाई 2015 को ट्राइबल अफेयर्स मंत्रालय ने खारिज कर दिया.

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