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लातेहार: पुलिस और बाल कल्याण विभाग ने मिलकर चार बच्चों को करवाया मुक्त, दलाल करवा रहा था मजदूरी

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LATEHAR, 22 NOVEMBER: जिले के सदर प्रखंड के नारेश्गढ़ ग्राम के चार नाबालिग बच्चे दलाल अनिल परहिया के बहकावे में आकर पांच नवम्बर को दिल्ली चले गये. बच्चों ने अपने परिजनों को भी इसकी सूचना नहीं दी थी. वहीं दलाल अनिल परहिया उन चारों बच्चों ( बल्केश्वर परहिया- पिता सूरज परहिया, धर्मदेव सिंह – पिता लक्ष्मण सिंह, अनुज परहिया – पिता लखन परहिया, छत्तू परहिया – पिता बेलास परहिया ) को गाजियाबाद के एक गन्ने के बागान में काम पर लगाकर वापस मनिका लौट गया . चारों बच्चों के परिजन उन्हें ढूंढ़कर परेशान थे. लेकिन कोई जानकारी नहीं मिल पा रही थी.

बच्चों के परिजन कई दिन तक रहे परेशान

वहीं पांच नवंबर से लापता हुए बच्चों के पिता- सूरज परहिया, लक्ष्मण सिंह, लखन परहिया, बेलास परहिया ने  पहले अपने रिश्तेदारों के घर पर बच्चों को खोजा. लेकिन आठ दिन की खोज के बाद भी जब बच्चे नहीं मिले. इसके बाद परिजनों को ग्रामीणों को यह जानकारी दी कि पांच नवंबर को अनिल परहिया के साथ बच्चों को  गांव से बाहर जाते उनलोगों ने देखा था. फिर इस मामले की सूचना 13 नवंबर को परिजनों ने लातेहार थाने को दिया.

पुलिस और बाल कल्याण की तत्परता से बच्चे लौटे घर

वहीं परिजनों की शिकायत के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया और बाल कल्याण कार्यालय से सम्पर्क साधा. फिर पुलिस और बाल कल्याण विभाग के संयुक्त तत्वाधान में एक टीम बनाकर छापेमारी की गयी और पहले मनिका निवासी दलाल अनिल परहिया को गिरफ्तार किया गया. दलाल की निशानदेही पर  गाजियाबाद गन्ना बागान में छापेमारी की गयी और चारों बच्चों को बरामद किया गया. वहीं नाबालिग बच्चों से मजदूरी करवाने के जुर्म में   गन्ना मिल के मालिक के खिलाफ गाजियाबाद पुलिस को सूचना दी गयी और सभी बच्चों को वहां से सुरक्षित निकाला गया. फिर पुलिस बच्चों को लातेहार लेकर आयी और परिजनों को सौंप दिया. अपने बच्चों को सुरक्षित पाकर परिजनों ने राहत महसूस किया.  

गन्ने की छिलाई करवाते थे मालिक – बच्चे

मुक्त कराये गये चारो बच्चे बल्केश्वर परहिया, धर्मदेव सिंह, अनुज परहिया और छत्तू परहिया ने बताया कि गन्ना मिल मालिक हमें खाना तो देते थे. लेकिन हमसे बहुत काम लिया जाता था. बच्चों ने बताया कि  उन सबसे गन्ने की  छिलाई करवाने के साथ ही गाय, बैल का गोबर भी फिंकवाया जाता था. साथ ही बच्चों ने बताया कि काम के दौरान उन्हें आरान करने का मौका भी नहीं दिया जाता था.    

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